अंतर्राष्ट्रीय मूलनिवासी दिवस 9 अगस्त 2026 कार्यक्रम इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में…
अंतर्राष्ट्रीय मूलनिवासी दिवस 9 अगस्त 2026 इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में मान.श्री जी.के.निर्माम पूर्व कुलसचिव, कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संजय शर्मा अधिष्ठाता छात्र कल्याण, विशिष्ट अतिथि डॉ. सी.आर.नेताम, अध्यक्ष अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ, अति विशिष्ट आमंत्रित अतिथि चंन्द्रशेखर खरे जी, उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ इं.गाँ.कृ.वि.वि.रायपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ.आर. आर. भंवर, डॉ. जी. पी. आयाम, डॉ. संजय भारिया, डॉ. सुनील नाग, डॉ. रवि श्रेय, श्री तिलक जी की गरिमामयी उपस्थिति में चंद्रशेखर खरे जी अति विशिष्ट आमंत्रित अतिथि एवं उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ इं.गाँ.कृ.वि.वि.रायपुर कैरियर मार्गदर्शन प्रदान करते हूए ARS, UPSC, CGPSC, SSC, ITI, IBPS, CGSSC, SI, ICAR, PAT, PET, NEET, CIPET, POLITECHNIC, छत्तीसगढ़ कलाकार पंजीयन एवं प्रोत्साहन सहित दो दर्जन प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश एवं सफलता के मूल मंत्र दिए, खरे जी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर रहेंगे, विदेशियो को देश मे शरणार्थी बनाकर बसाया जा रहा है और हम मूलनिवासियो को अपने ही जल, जंगल, जमीन से बेदखल किया जा रहा है अब भी समय है सब एक हो जाए अपने अधिकारो के प्रति, जल,जंगल,जमीन के मालिक, विश्व कुटुम्ब भारत के संरक्षक मूलनिवासी, पर्यावरण के भगवान आदिवासी ही वास्तविक संरक्षण एवं संवर्धन कर्ता हैं डॉ.खरे ने उपस्थित जनसमुदाय को विश्व आदिवासी दिवस की समस्त आदिवासियों भारत के मूलनिवासियों विश्व कुटुंब को समस्त खरे परिवार पामगढ़ की ओर से विश्वमूलनिवासी दिवस की हार्दिक हार्दिक बधाई, उज्जवल भविष्य की पावन मंगलमय शुभकामनाएँ प्रेषित किया, कार्यक्रम का संचालन पीएचडी रिसर्च स्कॉलर प्रज्ञा ठाकुर ने किया, अतिथियों का स्वागत सत्कार श्री अमरजीत भगत, ऋतिक, सहित कार्यक्रम को सफल बनाने में हजारों छात्र छात्राओं ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ इं.गाँ.कृ.वि.वि. द्वारा प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया कार्यक्रम को सफल बनाने में B. Sc., M. Sc., Ph.D.(ag.) के विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा।