छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की ‘डबल इंजन’ सरकार द्वारा शिक्षकों के बेजा इस्तेमाल और शिक्षा व्यवस्था के साथ किए जा रहे खिलवाड़ पर कड़ा विरोध व्यक्त किया गया है। प्रदेश में शिक्षकों का उपयोग राष्ट्र निर्माण और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए करने के बजाय सत्ता के राजनीतिक प्रदर्शनों के लिए किया जा रहा है।
इतिहास गवाह है कि शिक्षकों ने सदैव राष्ट्र हित में अपने कर्तव्यों का पालन किया है। शिक्षकों ने चुनाव संपन्न कराने से लेकर जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य पूरी निष्ठा से निभाए। यहाँ तक कि कोरोना काल के भीषण संकट में अपनी जान जोखिम में डालकर ‘कोरोना वॉरियर्स’ के रूप में सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। किंतु, वर्तमान साय सरकार ने संवेदनहीनता की सभी हदें पार कर दी हैं।
यह देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि किसी सरकार के मुखिया का जन्मदिन मनाने और राजनीतिक कार्यक्रमों को चमकाने का काम शिक्षकों से कराया जा रहा है, और वह भी एक दिन नहीं, बल्कि पूरे एक माह तक।
जिन शिक्षकों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हें प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीप जलाने और सरकारी आयोजनों की सजावट में लगा दिया गया है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और प्राथमिकताओं का खुला मज़ाक है। बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को दरकिनार कर शिक्षकों को राजनीतिक चाटुकारिता और सत्ता के उत्सवों में झोंकना प्रशासन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर करारा प्रहार है।
शर्मनाक बात यह है कि साय सरकार को कक्षाओं का उजाला और बच्चों का भविष्य नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक मंचों की रोशनी ज्यादा जरूरी दिखाई दे रही है। शिक्षकों के इस अमानवीय और गैर-शैक्षणिक उपयोग से प्रदेश का शैक्षणिक स्तर गिर रहा है और विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
हम मांग करते हैं कि सरकार तत्काल शिक्षकों से सभी गैर-शैक्षणिक व राजनीतिक कार्य लेना बंद करे और उन्हें पूरी निष्ठा से केवल अध्यापन कार्य करने दे, ताकि छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।



