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मजदूर-किसान एकता के नारों के साथ रायपुर में जुटे सैकड़ों लोग, तुता मंत्रालय मार्च में उठीं 11 सूत्रीय मांगें…

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रायपुर, 28 सितंबर 2026।शहीद शंकर गुहा नियोगी शहादत दिवस और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर कल 28 सितंबर को बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों और नागरिकों ने रायपुर के तुता में एकत्र होकर मंत्रालय की ओर मार्च किया। रायपुर तुता का पूरा धरनास्थल इंकलाबी नारों से देर शाम तक गूँजता रहा, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा – मजदूर कार्यकर्ता समिति के आव्हान पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न जनसंगठनों और श्रमिक संगठन शामिल रहे। कार्यक्रम में मजदूर-किसान एकता, सम्मानजनक जीवन, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा व सफ़ाईकामगारों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं रूप में मनोज कोसरे, रमाकांत बंजारे, राजिम टांडी, सुंदरिया, नारायण राव, नीरा डेहरिया, शालिनी गेरा, रामलाल कड़ियाम, आलोक शुक्ला, जयप्रकाश नायर, सुदेश टिकाम, सुमित परगनिहा, किरण, राजेश्वरी, मोतम भारती, कल्याण सिंह पटेल ने वर्तमान में मेहनतकश जनता की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रखर रूप से कहा कि आज मेहनतकश जनता उत्पादन और निर्माण की पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाती है, लेकिन इसके बावजूद मजदूरों को गरीबी, असुरक्षा, बेरोजगारी और अपमानजनक कामकाजी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। ठेका प्रथा, कम मजदूरी, असुरक्षित कार्यस्थल और श्रमिक अधिकारों के कमजोर होने पर भी चिंता व्यक्त की गई।

सभा में सफाई मजदूरों की स्थिति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शहरों को साफ रखने वाले सफाई कामगार स्वयं असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। नियमित रोजगार, उचित वेतन, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सम्मान की मांग को लेकर आवाज उठाई गई।

मजदूरों ने भिलाई के हॉस्पिटल सेक्टर में लंबे समय से रह रहे मजदूर परिवारों के आवास के सवाल को भी उठाया। वक्ताओं के अनुसार, हजारों मजदूर पिछले कई दशकों से यहां निवास कर रहे हैं और इनमें से बड़ी संख्या सेक्टर-9 अस्पताल तथा भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करती है। इसके बावजूद उन्हें बेदखली के नोटिस दिए जा रहे हैं। सभा में मजदूरों के आवास के अधिकार को सुनिश्चित करने और बेदखली की कार्रवाई रोकने की मांग की गई।

कार्यक्रम में 11 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखा गया। इनमें मजदूरों के लिए जीने लायक वेतन, सफाई मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरणों सहित नियमित करना, पूर्व श्रम कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, शहरी गरीब बस्तियों की उजाड़ने की कार्रवाई रोकना, हसदेव अरण्य से बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के जंगलों के विनाश पर रोक, सीमेंट संयंत्रों में एसीसी सहित सभी स्थानों पर सीमेंट वेज बोर्ड लागू करना, किसानों के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनाना, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बाहर आने, शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने तथा 57 हजार शिक्षकों की भर्ती करने की मांग शामिल रही।

सभा में मजदूरों, किसानों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं के विभिन्न ज्वलंत सवालों का तत्काल समाधान करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।

 

आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मानजनक जीवन, मेहनत के उचित मूल्य और भविष्य की सुरक्षा के सवाल से जुड़ा संघर्ष है। शंकर गुहा नियोगी के संघर्ष और भगत सिंह की विरासत को याद करते हुए वक्ताओं ने मेहनतकश जनता के अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

28 सितंबर कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या मौजूद संघर्षकारियों ने रायपुर तुता धरनास्थल से मंत्रालय की ओर मार्च कर तहसीलदार को मुख्यमंत्ती के नाम ज्ञापन सौंपा और मजदूर-किसान एकता को मजबूत करने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।

 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति, नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार यूनियन, मेहनतकश आवास अधिकार संघ, महिला मुक्ति मोर्चा और प्रगतिशील युवा संघ सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।

 

मजदूर-किसान एकता जिंदाबाद!

मजदूर एकता जिंदाबाद!

इंकलाब जिंदाबाद!

शहीदों के रास्ते पर चलो!