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हॉस्पिटल सेक्टर के रहवासियों को संपदा न्यायालय के नोटिस से बढ़ी चिंता, मेहनतकश आवास अधिकार संघ ने संघर्ष की रणनीति बनाई…

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भिलाई, 7 अक्टूबर 2026।मेहनतकश आवास अधिकार संघ के महासचिव कलादास डेहरिया ने प्रेस को बताया कि हॉस्पिटल सेक्टर में रहने वाले कुछ लोगों को संपदा न्यायालय द्वारा नोटिस भेजा गया है। नोटिस में 15 दिनों के भीतर आवास खाली करने तथा जितने वर्षों से वे वहां रह रहे हैं, उसके आधार पर लगभग 3 लाख रुपये किराये की राशि जमा करने का उल्लेख किया गया है। इससे मजदूर परिवारों के बीच गंभीर चिंता और भय का माहौल पैदा हो गया है।

इस संबंध में आज संघ की आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह सवाल प्रमुखता से उठाया गया कि इतने बड़े आर्थिक बोझ को मजदूर आखिर कहां से जुटाएंगे? संघ पहले से ही मांग करता रहा है कि पानी और बिजली का वास्तविक किराया प्रत्येक माह लिया जाए, लेकिन संयंत्र प्रबंधन ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया। अब दूसरी ओर वर्षों का किराया जमा करने और आवास खाली करने की बात कही जा रही है।

संघ का कहना है कि हॉस्पिटल सेक्टर के रहवासी पानी और बिजली का निर्धारित किराया प्रत्येक माह देने के लिए तैयार हैं, लेकिन आवास खाली करने के लिए दबाव बनाना मजदूर परिवारों के हित में नहीं है। वर्षों से यहां रहने वाले परिवारों के सामने अचानक आवास का संकट खड़ा करना गंभीर मानवीय समस्या है।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि वर्तमान में निगम चुनाव का समय है। ऐसे समय में यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि संकट की इस घड़ी में राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि हॉस्पिटल सेक्टर के मजदूर परिवारों के साथ किस प्रकार खड़े होते हैं। संघ का कहना है कि यदि इन परिवारों को अवैध निवासी माना जा रहा है, तो उनके आवास के अधिकार और भविष्य का भी समाधान किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र देकर हॉस्पिटल सेक्टर के रहवासियों के लिए आवास की व्यवस्था करने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। लगभग 3,000 मतदाताओं के परिवारों का भविष्य इस संकट से प्रभावित हो रहा है।

हॉस्पिटल सेक्टर के रहवासियों के सामने अब संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इसी सप्ताह नगर निगम और जिला प्रशासन को पुनः ज्ञापन सौंपकर आवास की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की जाएगी।

संघ ने सवाल उठाया है कि लगभग 400 बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य, तथा सैकड़ों अस्वस्थ और बुजुर्ग लोगों के जीवन का क्या होगा? यदि परिवारों को आवास से बेदखल किया जाता है तो इन बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों के जीवन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह केवल आवास का नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन और भविष्य से जुड़ा सवाल है।

बैठक में मुख्य रूप से सुंदरिया, शारदा मेश्राम, अनुसुइया, ब्रह्मा, अरुणा, नारायण राव, संतोषी, कलादास, नीरा, चंद्रलीला, इस्रातम्मा, लक्ष्मी, सुधा सहित सैकड़ों मजदूर साथी उपस्थित रहे।