प्यास लगना हर किसी के जीनव की एक सामान्य सी प्रक्रिया है. प्यास बुझाने के लिए हम पानी पीते हैं. हालांकि कई बार काफी पानी पीने के बाद भी प्यास नहीं बुझती है. इसे हम सामान्य समझकर इग्नोर कर देते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर दिन 3-4 लीटर पानी पीना चाहिए. लेकिन अगर पानी पीने के बावजूद बार-बार प्यास लगती है तो सावधान हो जाना चाहिए, ये बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है. ये संकेत डायबिटीज और एनीमिया जैसी बीमारियों की ओर इशारा हो सकता है. आइए जानते हैं यह कितना खतरनाक हो सकता है.
मेडिकल की भाषा में बार-बार प्यास लगने को पॉलीडिप्सिया कहा जाता है. ये कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है. हालांकि इसके दिखने पर हमें सतर्क जरूर हो जाना चाहिए. इसके पीछे के कई कारण हो सकते हैं जैसे मेहनत, पसीना निकलना, डिहाइड्रेशन या नमक वाली चीजों का ज्यादा सेवन आदि. साथ ही ज्यादा कैफीन और शराब का इनटेक भी ज्यादा प्यास का कारण हो सकता है. साथ ही साथ ये कई बीमारियों का संकेत हो सकता है.
ज्यादा प्यास लगना डायबिटीज का कारण हो सकता है. डायबिटीज के कारण भी बार-बार प्यास लग सकती है. मधुमेह रोगियों में ये काफी आम लक्षण होते हैं. जिन लोगों को डायबिटीज होती है. उनके खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिसको किडनी आसानी से नहीं छान पाती है ऐसे में ये शुगर यूरिन के जरिए बाहर निकलती है. इस वजह से शरीर में पानी की कमी होती है और बार-बार प्यास लगती है. ब्लड प्रेशर बढ़ने और हार्ट फेलियर तक में सामान्या से ज्यादा प्यास लग सकती है. अगर बार-बार पेशाब आए और अधिक प्यास लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
ड्राई माउथ मतलब है मुंह सूखना. जब आपके मुंह में पर्याप्त मात्रा में लार यानी सलाइवा नहीं बनता है, तब ये समस्या आती है. इसमें बार बार प्यास लगना मुख्य लक्षण माना जाता है. इसके चलते मुंह, गला और जीभ रूखी हो सकती है. इस स्थित में होंठ भी फट जाते हैं. कई बार बहुत सी दवाइयां खाने पर भी मुंह सूख सकता है ऐसे में ये समस्या होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.
एनीमिया के चलते भी बार बार प्यास लग सकती है. जब हमारा शरीर पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता है तो धीरे-धीरे रेड ब्लड सेल्स की कमी होने लगती है. इस स्थिति में आपको एनीनिया हो सकता है. ऐसे में आपको थकान या फिर तेज नब्ज का चलना या फिर मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है. यह समस्या महिलाओं में हैवी ब्लीडिंग और लोगों के खराब खान-पान की वजह से हो सकती है. ऐसे में ऐसा महसूस होने पर डॉक्टर को दिखाएं.



