March 8, 2026

14 जुलाई 2025 की शाम 4:35 बजे के आसपास ड्रैगन कैप्सूल के ISS से अलग होने के साथ धरती पर वापस लौटेंगे शुभांशु शु्क्ला और उनकी टीम …

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नई दिल्ली 12 जुलाई 2025: एक्सिओम स्पेस (Axiom Space) ने घोषणा की है कि उनकी #Ax4 मिशन की टीम 14 जुलाई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 4:35 बजे के आसपास ISS से अलग होगी. इस मिशन में शामिल भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी पृथ्वी पर वापस लौटेंगे, जो भारत के लिए गर्व का क्षण है.

मिशन #Ax4: एक ऐतिहासिक सफर

#Ax4 मिशन एक निजी अंतरिक्ष मिशन है, जिसे एक्सिओम स्पेस और स्पेसएक्स के सहयोग से शुरू किया गया. यह मिशन 25 जून 2025 को स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से शुरू हुआ था. इस टीम में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें कमांडर पेगी व्हिटसन (अमेरिका), पायलट शुभांशु शुक्ला (भारत) और मिशन विशेषज्ञ स्लावोस्ज उज्नान्स्की-विश्निव्स्की (पोलैंड) और टिबोर कापु (हंगरी) हैं. यह मिशन न केवल वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए है, बल्कि भारत, हंगरी और पोलैंड के लिए पहला सरकारी प्रायोजित अंतरिक्ष मिशन भी है.

शुभांशु शुक्ला, जो भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और स्पेस स्टेशन जाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री हैं, इस मिशन में पायलट की भूमिका निभा रहे हैं. वह 1984 में राकेश शर्मा के बाद भारत से अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे व्यक्ति हैं. इस मिशन के दौरान उन्होंने कई प्रयोग किए, जैसे कि अंतरिक्ष में पौधों की वृद्धि और मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण) के प्रभाव का अध्ययन. उनकी वापसी भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

ड्रैगन कैप्सूल की वापसी का समय और प्रक्रिया

ड्रैगन कैप्सूल, जो स्पेसएक्स द्वारा बनाया गया है, 14 जुलाई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 4:35 बजे से पहले ISS से अलग होगा. यह समय मौसम और तकनीकी स्थितियों पर निर्भर कर सकता है, इसलिए इसमें थोड़ा बदलाव भी संभव है.

कैप्सूल पृथ्वी की ओर बढ़ेगा और समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग करेगा, जहां से टीम को रेस्क्यू जहाज द्वारा सुरक्षित निकाला जाएगा. इस मिशन की खास बात यह है कि ड्रैगन कैप्सूल 7 लोगों तक को ले जाने में सक्षम है. यह पहला निजी अंतरिक्ष यान है, जो मानवों को ISS तक ले गया.

इस मिशन का महत्व#Ax4

मिशन भारत के लिए इसलिए खास है क्योंकि यह इसरो के गगनयान मिशन की तैयारी का हिस्सा है. शुभांशु शुक्ला का ISS में जाना भारत को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान में नई पहचान देगा. इसके अलावा, यह मिशन दिखाता है कि निजी कंपनियां (जैसे एक्सिओम और स्पेसएक्स) अंतरिक्ष यात्रा को और सुलभ बना रही हैं. भारत भी भविष्य में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को ISS भेजने और स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है.

 

 

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