केंद्र सरकार आज संसद में पेश कर सकती है नया आयकर विधेयक…
नई दिल्ली। केंद्र सरकार सोमवार, 11 अगस्त 2025 को संसद में संशोधित आयकर विधेयक, 2025 पेश करने जा रही है। यह विधेयक संसद की चयन समिति द्वारा सुझाए गए कई अहम सुझावों को शामिल करने के बाद तैयार किया गया है। इससे पहले, 08 अगस्त 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पुराना आयकर विधेयक संसद से वापस ले लिया था।
गौरतलब है कि आयकर विधेयक, 2025 को इसी साल फरवरी में लोकसभा में पेश किया गया था। लेकिन, चयन समिति की विस्तृत समीक्षा और करदाताओं के लिए इसे और सरल बनाने की जरूरत को देखते हुए इसमें कई बदलाव किए गए हैं।
सरकार ने स्वीकार किए 285 सुझाव
संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय लोकसभा चयन समिति ने 21 जुलाई 2025 को संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें 285 सुझाव दिए गए थे। रिजिजू ने कहा, “सरकार ने इन सभी सुझावों को स्वीकार कर लिया है। संशोधित विधेयक को और अधिक स्पष्ट, सरल और टैक्सपेयर्स फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया गया है।”
करदाताओं को होगा फायदा
सूत्रों के मुताबिक, संशोधित विधेयक में कर दरों, छूटों और रियायतों से जुड़े प्रावधानों को अधिक स्पष्ट किया गया है, ताकि करदाताओं को जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिले। साथ ही, डिजिटल फाइलिंग और त्वरित रिफंड जैसी सुविधाओं को भी कानूनी ढांचा देने का प्रावधान किया गया है।
चयन समिति की सिफारिशें क्यों अहम हैं?
चयन समिति की रिपोर्ट में न केवल तकनीकी बदलाव सुझाए गए थे, बल्कि छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और मध्यम वर्ग के करदाताओं के लिए राहतकारी प्रावधानों को भी शामिल करने की सिफारिश की गई थी। यही कारण है कि सरकार ने पुराने विधेयक को वापस लेकर एक संशोधित, अधिक उपयोगी संस्करण तैयार किया।
संशोधित आयकर विधेयक में क्या हो सकते हैं बदलाव?
सूत्रों के अनुसार, नए विधेयक में निम्न बदलाव संभव हैं—
कर दरों और स्लैब में बदलाव
डिजिटल टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाना
त्वरित रिफंड प्रक्रिया लागू करना
छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को टैक्स में राहत
मध्यम वर्ग के लिए अधिक छूट और रियायतें
क्यों अहम है यह विधेयक?
यह विधेयक भारत के कर ढांचे में Income Tax Reform 2025 के रूप में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यदि यह पारित हो जाता है, तो करदाताओं को न केवल टैक्स भुगतान प्रक्रिया में आसानी होगी बल्कि पारदर्शिता और समय पर रिफंड जैसी सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।
अब सभी की निगाहें सोमवार को संसद में पेश होने वाले इस संशोधित विधेयक पर टिकी हैं, जो यदि पारित हो गया, तो यह भारत के कर ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।