June 6, 2026

खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी नागरिकों पर ही पाकिस्तान की सेना ने गिराए बम,30 की मौत।

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  • तिराह घाटी हमले में 30 नागरिकों की मौत हुई।
  • चीन निर्मित जेएफ-17 से एलएस-6 बम गिराए गए।
  • ग्रामीणों ने इसे निर्दोषों का कत्लेआम करार दिया।

 पेशावर। खैबर पख्तूनख्वा के तिराह घाटी में रविवार तड़के हुए हवाई हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। मातरे दारा गांव पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के कथित हमलों में कम से कम 30 नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। रात दो बजे हुए इन हमलों ने घरों को मलबे में तब्दील कर दिया, जिससे दर्जनों लोग दब गए।

 

चीन के हथियारों से हमला

खबरों के मुताबिक पाकिस्तान वायुसेना ने चीन के जेएफ-17 थंडर जेट का इस्तेमाल किया। कम से कम आठ एलएस-6 प्रिसिजन ग्लाइड बम गिराए। खुफिया सूत्रों का दावा है कि गांव में किसी आतंकवादी की मौजूदगी की पुष्टि नहीं थी। ऐसे में सेना की ओर से टीटीपी ठिकानों को निशाना बनाने की दलील सवालों के घेरे में है।

 

हमले से ग्रामीणों का आक्रोश

स्थानीय निवासियों ने इसे ‘कत्लेआम’ करार दिया। उनका कहना है कि बमबारी ने पूरे बस्तियों को तहस-नहस कर दिया। गांव शवों से भर गए हैं। यह हमला मवेशियों, घरों व इंसानों को भी निगल गया।

 

जनजातीय विरोध और धरना

हमले के बाद आक्रोशित आकाखेल जनजाति ने जिरगा बुलाया। उन्होंने घोषणा की कि पुरुष और बच्चों के शव कॉर्प्स कमांडर हाउस के बाहर रखे जाएंगे। खैबर चौक पर धरना शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर निर्दोषों के कत्ल का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े प्रदर्शन जल्द ही पेशावर में होंगे।

 

पाकिस्तानी सेना का बयान

पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों से इंकार किया। आईएसपीआर ने बयान में कहा कि यह हमला नहीं है। आतंकी बारूद विस्फोट हुआ था, जिसमें 12-14 आतंकियों के साथ 8-10 नागरिक मारे गए हैं। सेना ने टीटीपी पर आरोप लगाया कि उन्होंने घरों और मस्जिदों के पास विस्फोटक छिपाए थे।

अंतरराष्ट्रीय सवाल

सूत्रों ने बताया कि प्रिसिजन ग्लाइड बमों का इस्तेमाल साफ तौर पर इरादतन कार्रवाई साबित करता है। चीनी हथियारों के इस्तेमाल से बीजिंग की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हाल के हफ्तों में खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज हुई है।