ट्रंप सरकार का बड़ा झटका: 90 लाख की वीज़ा फीस और विदेशों में रेसिज़्म का बढ़ता खतरा…
ट्रंप सरकार का बड़ा झटका: 90 लाख की वीज़ा फीस और विदेशों में रेसिज़्म का बढ़ता खतरा
क्या सिर्फ डॉलर की चमक के लिए भारतीय अपनी इज्ज़त और सुरक्षा दांव पर लगाएँ?
बचपन की यादें और परदेस का खिंचाव
बचपन में मां गाया करती थीं- “मेरे पिया गए रंगून, वहाँ से किया है टेलीफोन, तुम्हारी याद सताती है”, “सात समंदर पार से, पापा जल्दी आ जाना…”। इन गीतों में परदेस गए पिता की याद थी। यह सिर्फ एक गीत नहीं था, बल्कि उस दौर के लाखों परिवारों की भावनाएँ थीं, जिनके प्रियजन नौकरी या बेहतर अवसर की तलाश में विदेश गए।
आज भी वही खिंचाव कायम है- उच्च शिक्षा, करियर
ग्रोथ और बेहतर जीवन स्तर की तलाश में भारती विदेश की राह पकड़ते हैं।
ग्रोथ और बेहतर जीवन स्तर की तलाश में भारतीय युवा विदेश की राह पकड़ते हैं।
विदेश क्यों आकर्षित करता है?
विदेश में जाने के कई कारण हैं:
बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ
उच्च स्तरीय शिक्षा और रिसर्च के अवसर
स्थिर सिस्टम, लॉ एंड ऑर्डर और सुविधाओं से भरा जीवन
कुछ देशों की आसान इमिग्रेशन नीतियाँ
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने
भारतीय प्रतिभाओं को खुले हाथों से अपनाया। डा इंजीनियर, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स ने वहां दिन-रात
भारतीय प्रतिभाओं को खुले हाथों से अपनाया। डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स ने वहां दिन-रात काम करके नाम कमाया और अरबों डॉलर भारत भेजे। पंजाब, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था आज भी प्रवासी भारतीयों पर काफी हद तक टिकी है।
ट्रंप सरकार का नया संदेश
हाल ही में अमेरिका की ट्रंप सरकार ने H-1B वीज़ा की फीस लगभग 1 लाख डॉलर (करीब 90 लाख रुपये) कर दी। यह सिर्फ फीस बढ़ोतरी नहीं, बल्कि एक संदेश है-“अब हमें आपकी ज़रूरत नहीं है।”
सोचिए, जिन देशों ने भारतीय प्रतिभा से अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत की, वही आज उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेश की चकाचौंध और कड़वी हकीकत
चमक-दमक के पीछे एक कड़वी हकीकत भी है-रेसिज़्म और भेदभाव।
ऑस्ट्रेलिया में 2008 से 2025 के बीच भारतीयों पर लगभग 200 नस्लीय हमले हुए।
अमेरिका में हाल ही में एक भारतीय की छोटी बहस पर हत्या कर दी गई और शव को फुटबॉल की तरह लात मारकर डस्टबिन में फेंक दिया गया।
ब्रिटेन और कनाडा से भी लगातार हमलों और भेदभाव की खबरें आती रही हैं।
सवाल यह है-क्या सिर्फ ऊँचे वेतन और चमकीले शहरों के लिए हमें अपनी इज्ज़त और सुरक्षा दांव पर लगानी चाहिए?