मन ही सुख एवं दुख का प्रमुख कारण है-विभु जी महाराज
भिलाई। सदगुरू सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से मानव उत्थान सेवा समिति छत्तीसगढ़ द्वारा 8 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक सदभावना कार यात्रा के पांचवा एवं समापन दिवस पर 12 अक्टूबर को सदभावना सम्मेलन रावणभाठा रिसाली सेक्टर भिलाई में आयोजित हुआ जिसमें मुख्य प्रवक्ता के रूप में परमपूज्य श्री वुभी जी महाराज के मुखारविंद से सत्संग प्रवचन हुआ जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
सदभावना सम्मेलन में श्री विभु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा कि तू मन बने बने कह कर संबोधित करते हुए सत्संग में कहा कि आपके छत्तीसगढ़ में आकर मेरा मन बच्चों जैसा हो जाता है, अगर हम अपने जीवन को देखें कि हमारा जीवन पहले कैसा था, आज कैसा है यह जो बदवान हमारे जीवन में हुआहै, एक व्यक्तित्व का, समझ का, सूझ-बूझ का, आज हम अपने आपको पहले की तरह नहीं मान पाते, बहुत सारी रूप-केशाओं में तो इसके पीछे जीवन के संघर्षों का एक पहुत बडज़ा हाथ है, क्योंकि जीवन में अगर वे संघर्ष-परेशानियाँ, यह, यह दुख नहीं होता, तो जो व्यक्तित्व आज हमने पाया है, वह व्यक्तित्व भी हमारा नहीं बन पाता। असर यह होता है कि जब बुरा समय आता तो हमारा मन इतना निर्बल हो जाता है कि हम ये नहीं सोच पाते है कि इससे परे भी एक जीवन है। अगर दुख में होतो तो उस दुख के साया में भी अपने जीवनको जीते है और बार-बार मन उसी वस्तु का चिन्तन करता रहता है इसीलिए महापुरूष, कहते है कि अपने मन को समझो। मन ही दुख का कारण है, मन ही बंधन का कारण है एवं मन ही मोक्ष का भी कारण है, मन ही बंधन का कारण है एवं मन ही मोक्ष का भी कारण है। अब आप ही सोचिए, आप ही देखिए, जीवन को जीना हमें हर दिन होता है। मोक्ष और शांति, ये बहुत बड़ी जीवन की उपलब्धि है, जिसके बारा में हमारा शास्त्रों में वर्णन किया गया है, लेकिन शारखों में ये भी बताया गया है कि जिन लोगों ने मोक्ष की प्राप्ति की, उन्होने कितनी साधझना की और कितना संघर्ष किया अपने जीवन में। इस आधानुकि जीवन में ऐसी मानसिकता से घिर गए है कि हम चाहते है तो हमारे जीवन में शांति लेकिन उसके लिए कोई त्याग और तपस्या नहीं करना चाहता है और अंत समय में जिसका चिन्तन करोगे वही वापस जाना पड़ता है।
सदभावना सम्मेलन समापन के अवसर पर ललित चन्द्राकर जी (दुर्ग ग्रामीण विधायक) बतौर अतिथि सम्मिलित हुए उन्होने कहा कि भारत ही ऐसा देश है जिसे हम माता कहकर पुकारते हैं। आज अध्यात्मिक गुरूओं की बदौलत भारत विश्व गुरू बनने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। भारत सम्पूर्ण विश्व को राहत दिखाने सक्षम है कार्यक्रम में श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली एवं तुलसी साहू, सुनील पटेल, बृजेश बिजपुरिया, स्वीटी कौशिक, सुन्दर लाल साहू, झमित गायकवाड़, अनुपम साहू सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संचालन महात्मा हरिसंतोषानंद ने किया। सम्मेलन में विभिन्न तीर्थस्थलों से महात्मागण सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रभारी महात्मा, महात्मा भुनेश्वरी बाई एवं कार्यकर्ताओं में रोहित नायक, उग्रसेन पटेल, रमेश सिंघल, कृष्णकुमार साहू, केशव पटेल, संतोष साहू, बी.एस. दुग्गा, श्रवण यादव, सी.एस. अधिकारी, जी.डी. कोठवारे, सी.आर. चौरके, लच्छु देशमुख, राजेश निषाद, के.के. शर्मा एवं महिला प्रकोष्ठ मानव सेवा दल तथा यूथ विंग की सहभागिता रही।
कार्यक्रम में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की मनोहक प्रस्तुति दी
