March 11, 2026

सीपीआई कोण्डागांव ने सौंपा महामहिम राज्यपाल व मुख्य मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन…

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  • तृतीय-चतुर्थ वर्ग में स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी देने और खनिज सम्पदा का दोहन सहकारी समिति के माध्यम से करने

कोण्डागांव 15 अक्टूबर । सीपीआई छत्तीसगढ़ राज्य परिशद् सचिव मंडल सदस्य तिलक, जिला परिशद् कोंडागांव के सचिव शैलेश, सह सचिव द्वय दिनेश, जयप्रकाश, लक्ष्मण, मुकेष, सरादू, बिसम्बर, रिंकू, रामचंद, रमेष, रामसिंह, षिवषंकर, देवनाथ, गंदरु, सवालाल, लाल कुमार, रामकुमार, सरादू, सुबरु आदि सहित जिले के अन्य सदस्यगण द्वारा महामहिम राज्यपाल, मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन को सम्बोधित तथा बस्तर संभाग के शिक्षित बेरोजगारों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की सभी भर्तियों में प्राथमिकता देने तथा खनिज संपदा के दोहन पर स्थानीय हितों की रक्षा करने विषयक एक ज्ञापन 15 अक्टूबर को एस.ड़ी.एम.कोण्डागांव को सौंपा गया है। सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बस्तर संभाग एक आदिवासी बाहुल्य एवं सामाजिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र है, जो लंबे समय से शिक्षा, संसाधन और रोजगार के अवसरों की दृष्टि से राज्य के अन्य अंचलों की तुलना में अत्यधिक पिछड़ा हुआ है। संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत इस क्षेत्र को विशेष संरक्षित दर्जा प्राप्त है, जिससे यहां के स्थानीय निवासियों को प्रशासनिक सेवाओं और रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता देने का अधिकार सुनिश्चित किया गया था। किन्तु, वर्तमान में बस्तर संभाग में संचालित तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों में बाहरी जिलों एवं संभागों के अभ्यर्थियों को अवसर दिए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है। यह स्थिति इस क्षेत्र के युवाओं में गहरी निराशा और असंतोष उत्पन्न कर रही है। वहीं दूसरी तरफ बस्तर संभाग की खनिज संपदा इस क्षेत्र की संस्कृति, पर्यावरण और आजीविका का आधार है। वर्तमान में निजी एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खनिज क्षेत्रों में लीज प्रदान की जा रही है, जिससे आदिवासी समाज के जीवन, पर्यावरण एवं ग्राम स्व शासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आदिवासी समाज की संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।

सीपीआई जिला परिषद् कोण्डागांव की पहली मांग- बस्तर संभाग के अंतर्गत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की होने वाली सभी नियुक्तियों में स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता दी जाने। शासन द्वारा न्यायालय में प्रभावी पैरवी करके स्थानीय भर्ती के अधिकार को संविधान एवं पांचवीं अनुसूची के अनुरूप पुनः बहाल कराने। एक स्थायी नीति बनाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि बस्तर संभाग की सरकारी नियुक्तियों का लाभ केवल संभाग के स्थायी निवासियों को ही प्राप्त हो। पांचवीं अनुसूची के तहत स्थानीय नियुक्तियों की नीति को विधिक संरक्षण दिया जाए ताकि भविष्य में यह अधिकार समाप्त न हो सके।

दूसरी मांग- खनिज संपदा एवं जल-जंगल-जमीन से जुड़ी खनिज उत्खनन एवं संचालन केवल स्थानीय सहकारी समितियों या सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से कराया जाए। किसी भी खदान का लीज देने से पूर्व संबंधित ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य की जाए। निजी/ बहुराष्ट्रीय कंपनियों को नई खनिज लीज देने की प्रक्रिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए एवं पूर्व में हुए एमओयू तत्काल निरस्त किए जाएँ। राज्य खनिज निगम द्वारा स्थानीय उत्खनन कार्यों की निगरानी सुनिश्चित की जाए। एनएमडीसी, नगरनार स्टील प्लांट व अन्य सार्वजनिक संस्थानों में ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाए तथा स्थायी रोजगार नीति बनाई जाए।

उपर्युक्त दोनों विषय बस्तर के जनजीवन से सीधे जुड़े हैं और इन पर त्वरित, ठोस एवं न्याय संगत कार्रवाई अपेक्षित है। पूर्व में भी प्रेशित किए जा चुके उपरोक्त दोनों मांगों पर यदि शासन-प्रशासन ने पुनःगंभीरतापुर्वक विचार नहीं किया, तो सीपीआई जिला परिषद कोण्डागांव को बस्तर के जन समर्थन के साथ व्यापक जनांदोलन चलाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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