PM Modi ने ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन 2025’ का उद्घाटन किया, RDI योजना कोष की शुरुआत…
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में उभरते विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) 2025 का उद्घाटन किया। देश में अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) योजना निधि का भी शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य देश में निजी क्षेत्र द्वारा संचालित अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 31 जुलाई, 2025 के एक बयान के अनुसार, “इस योजना का कुल परिव्यय 6 वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से 20,000 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसे भारत की समेकित निधि से वित्त पोषित किया जाएगा। यह दीर्घकालिक कम या शून्य-ब्याज ऋण, इक्विटी निवेश और डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स में योगदान प्रदान करता है। इस योजना के तहत अनुदान और अल्पकालिक ऋण प्रदान नहीं किए जाते हैं।”
ईएसटीआईसी 2025 का आयोजन 3 से 5 नवंबर तक किया जा रहा है।
इस सम्मेलन में शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और सरकार के 3,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ-साथ नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रख्यात वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक और नीति निर्माता भी शामिल होंगे।
विचार-विमर्श 11 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें उन्नत सामग्री और विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-विनिर्माण, नीली अर्थव्यवस्था, डिजिटल संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और अर्धचालक विनिर्माण, उभरती कृषि प्रौद्योगिकियां, ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु, स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकियां, क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
ईएसटीआईसी 2025 में अग्रणी वैज्ञानिकों द्वारा वार्ता, पैनल चर्चा, प्रस्तुतियां और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन भी शामिल होंगे, जो भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए शोधकर्ताओं, उद्योग और युवा नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
इस बीच, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “आज दुनिया हमें सम्मान और आदर की दृष्टि से देखने लगी है। मेरा मानना है कि एक दिन इतिहासकार इस बात का भी विश्लेषण करेंगे कि हमें इस सुखद अनुभव के लिए आजादी के 70 साल बाद तक इंतजार क्यों करना पड़ा। क्योंकि इस देश में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं में प्रतिभा, क्षमता और कड़ी मेहनत करने की इच्छाशक्ति थी। उनकी आँखों में सपने और दिलों में आकांक्षाएँ थीं, लेकिन शायद उनके पास संसाधनों और सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का अभाव था। विक्रम साराभाई की साइकिल पर अपना कुछ सामान ले जाते हुए तस्वीरें याद कीजिए… प्रधानमंत्री ने विज्ञान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने हमारे देशवासियों को यह एहसास और समझ दिलाई कि 21वीं सदी में प्रगति का मार्ग केवल विज्ञान और नवाचार के मील के पत्थरों से होकर ही जाता है।”