25 दिसम्बर को नई पंजीकृत मुक्त स्वर साहित्य समिति के तत्वावधान में न्यू रुआबांधा सेक्टर में एक बैठक आयोजित की गई…
25 दिसम्बर को नई पंजीकृत मुक्त स्वर साहित्य समिति के तत्वावधान में न्यू रुआबांधा सेक्टर में एक बैठक आयोजित की गई, पंजीकृत समिति के नियमानुसार समिति को एक नई ऊर्जा देने के लिए कार्यकारिणी का गठन किया गया।
सर्व सम्मति से पर्यवेक्षक डाॅ. जय प्रकाश शर्मा ने चुनाव सम्पन्न करवाया। समिति के नये पदाधिकारियों में अध्यक्ष गोविन्द पाल का चुनाव किया गया। महासचिव – नरेंद्र कुमार सिक्केवाल, उपाध्यक्ष – शीशलता शालू एवं मनोज कुमार शुक्ल, कोषाध्यक्ष -संतोष जाटव ‘जालौनी’ उप- कोषाध्यक्ष-उज्वल प्रसन्ना,
उप – सचिव – शंकर भट्टाचार्य एवं – भूषण – चिपड़े, संयोजक – पंडित वासुदेव भट्टाचार्य एवं श्रीमती सोनिया सोनी, प्रचार सचिव – अर्जुन मंडल (सोशल मीडिया) जावेद हसन (प्रिंट मीडिया) लीगल एडवाइजर कमेटी के लिए – डाॅ जय प्रकाश शर्मा (प्रभारी), एडवोकेट – मनोज कुमार शुक्ल एवं एडवोकेट सत्यवती शुक्ल को जिम्मेदारी दी गई। प्रधान संरक्षक के रुप में – रजनीकांत श्रीवास्तव का नाम प्रस्तावित किया गया। इसके अलावा – डाॅ सुचित्रा शर्मा, गायक श्यामल गोस्वामी, नेहा वार्ष्णेय, डाॅ अमर शर्मा को संरक्षक सदस्य के रूप में चुना गया।
इसके अलावा मासिक बुलेटिन, पत्रिका प्रकाशन, तथा साझा संकलन प्रकाशित करने के लिए एक अलग संपादक मंडल तैयार किया गया जिसमें – प्रधान संपादक – दलाल समाद्दार, प्रबंध संपादक – नरेंद्र कुमार सिक्केवाल, संपादक-गोविंद पाल,सह-संपादक-दयालन माधवन (उन्नी) इसके अलावा संपादक मंडल सदस्यों में- शंकर भट्टाचार्य, रजनीकांत श्रीवास्तव, वीरेंद्र सरकार, डाॅ सुचित्रा शर्मा, संतोष जाटव ‘जालौनी’ आदि को सर्वसम्मति से नियुक्त किया गया। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्यों में – संत कवि ओंकार दास, डॉ जयप्रकाश शर्मा, इस्माइल आजाद, प्रिया गुप्ता, वीरेंद्र सरकार,विपुल सेन,वी.नाथ, क्रमशः—
शमशीर शिवानी,सत्यवती शुल्क, ब्रजेश मल्लिक, आर. एन. देवनाथ, रियाज गौहर खान आदि चुने गये। कार्यक्रम का संचालन शीशलता शालू ने की। चुने हुए पदाधिकारियों ने मिलकर मुक्तस्वर साहित्य समिति के लिए तन मन धन व समर्पण तथा निष्ठा भाव से कार्य करने के लिए सपथ लिए ।
अंत में ज्ञान पीठ सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ व विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत साहित्यकार को श्रद्धांजलि दी गई । उपस्थित सभी लोगों ने मुक्तस्वर साहित्य समिति को आगे बढ़ाते हुए साहित्य के विकास के लिए अलग अलग सुझाव दिए जिसे सभी लोगों ने माना।






