मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को निरस्त करने सहित केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का मांग पत्र…
आज दिनांक 21 जनवरी 2026 को संयुक्त ट्रेड यूनियन, भिलाई (इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, ऐक्टू, लोईमो व स्टील वर्कर्स यूनियन) द्वारा चार श्रम संहिता के कार्यान्वयन की अधिसूचना दिनांक 21 नवम्बर 2025 की वापसी तथा मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को निरस्त करने सहित केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का मांग पत्र एवं बीएसपी के स्थायी व ठेका श्रमिकों की लंबित मांगों के समर्थन में 12 फरवरी 2026 को एक दिवसीय हड़ताल करने की लिखित सूचना श्रीमान निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र, भिलाई के नाम बीएसपी औद्योगिक संबंध के महाप्रबंधक श्रीमान विकास चन्द्रा को दिया गया।
समस्त ट्रेड यूनियन के नेतागणों ने संबोधित करते हुए बताया कि चारों लेबर कोड मजदूर विरोधी है, श्रमिकों द्वारा दशकों से अर्जित अधिकारों पर हमला, हड़ताल के अधिकार को सीमित करना, स्थायी रोजगार को कमजोर करना तथा ठेका एवं अस्थायी रोजगार को बढ़ावा देना बताया।
यह हड़ताल सिर्फ व सिर्फ मजदूरों के खिलाफ लाए गए श्रम संहिताओं के विरोध में नहीं है अपितु किसानों का न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, बीज विधेयक, जन विरोधी विद्युत विधेयक सहित एवं जन विरोधी नीतियों की वापसी, जल, जंगल, जमीन व कृषि भूमि तथा खाद्य सुरक्षा की रक्षा का भी सवाल है।
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा लगातार श्रमिकों के विभिन्न मांगों जैसे सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, न्यूनतम वेतन ₹26000 प्रति माह, समान काम का समान वेतन, स्थायी कार्यों में ठेकेदारी प्रथा /आउटसोर्सिंग की समाप्ति, निर्धारित शर्तों पर नौकरी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों-बैंक, बीमा, रक्षा, रेलवे आदि के निजीकरण एवं विनिवेश पर रोक इत्यादि मांगों पर पूर्ण क्रियान्वयन की मांग को लेकर यह हड़ताल जरूरी हाँ।
सरकार व नियोक्ताओं द्वारा ट्रेड यूनियनों के साथ सार्थक वार्ता से इनकार करना जैसे सेल कर्मचारियों का वेतन समझौता नहीं करना, बकाया 39 महीने का एरियर भुगतान नहीं करना, ग्रेच्युटी व बोनस योजनाओं पर एकतरफा निर्णय लेना, मूल वेतन को उत्पादन के साथ जोड़ना श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित करने का परंपरा तैयार किया जा रहा है। जिससे औद्योगिक शांतिभंग हो रही है।
बीएसपी में एक तरफ नई भर्ती पर रोक लगा दिया गया है तो दूसरी तरफ चालू ठेके में भी 20 प्रतिशत ठेका श्रमिकों की छटनी करने का आदेश जारी कर दिया है, और तो और ठेका श्रमिकों नौकरी की सुरक्षा किसी भी प्रकार से सुनिश्चित नहीं है। ठेकेदारों का अपना अलग कानून बताते हैं। क्या ठेका श्रमिकों को अपने हितों की रक्षा करने का अधिकार नहीं है ? जब दूसरा कोई रास्ता नहीं होता है, हड़ताल करना अतिआवश्यक हो जाता है।
12 फरवरी 2026 की अखिल भारती हड़ताल को सफल बनाने को लेकर संयुक्त ट्रेड यूनियन, भिलाई के नेतृत्व में काफी संख्या में कर्मचारी गण भी हड़ताल नोटिस देने उपस्थित हुए। यूनियनों ने भिलाई इस्पात संयंत्र के समस्त स्थायी व ठेका श्रमिकों से अपील करता है कि मुख्यतः मजदूर विरोधी तार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के खिलाफ उपरोक्त हड़ताल को सफल बनाने के लिए कमर कस लेवें। धन्यवाद,


