भारत, जापान और कोरिया के साथ US की डील, कोयले के निर्यात में होगी बढ़ोतरी: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका अब दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादक देश बन चुका है और तेजी से ऐनर्जी एक्सपोर्टर भी बन रहा है. उन्होंने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और भारत समेत कई देशों के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों से अमेरिकी कोयले के निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी होगी. वहीं भारत ने साफ किया है कि उसकी ऊर्जा से जुड़ी नीतियां सिर्फ राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं.
वॉशिंगटन डीसी में आयोजित चैंपियन ऑफ कोल कार्यक्रम में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय दुनिया में एनर्जी प्रोडक्शन में नंबर एक है. उनके मुताबिक अमेरिका अब बड़े स्तर पर ऊर्जा निर्यात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बता दें, ट्रंप ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जापान, दक्षिण कोरिया, भारत और अन्य देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते किए गए हैं. इन समझौतों से अमेरिका के कोयले के निर्यात में भारी इजाफा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कोयले की गुणवत्ता दुनिया में सबसे बेहतरीन मानी जाती है.
भारत का रुख साफ
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब 9 फरवरी को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ऊर्जा आयात को लेकर भारत का रुख साफ किया था. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि भारत रूस से तेल आयात कम कर रहा है. इस पर विदेश मंत्रालय की विशेष ब्रीफिंग में मिस्री ने कहा कि भारत के ऊर्जा से जुड़े फैसले हमेशा राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.
विक्रम मिस्री ने बताया कि असल में तेल और गैस की खरीद का फैसला तेल कंपनियां करती हैं. ये कंपनियां बाजार की स्थिति को देखकर निर्णय लेती हैं. इसमें उपलब्धता, जोखिम, कीमत और परिवहन जैसी कई बातों को ध्यान में रखा जाता है. कंपनियां अपने नियमों और जिम्मेदारियों के तहत फैसला करती हैं. उन्होंने कहा कि हर समय कई तरह के आर्थिक और लॉजिस्टिक पहलुओं पर विचार किया जाता है. आगे भी सरकार और कंपनियां वही फैसले लेंगी जो देश के हित में होंगे.
ध्यान में रखने होते हैं कई पहलू
मिस्री ने यह भी कहा कि भारत तेल और गैस के मामले में आयात पर निर्भर देश है. एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत को अपने संसाधनों और आयात पर निर्भरता के असर, खासकर महंगाई पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान रखना पड़ता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि इस तरह जहां अमेरिका अपने कोयले के निर्यात को बढ़ाने की बात कर रहा है. वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति का आधार केवल राष्ट्रीय हित, उचित कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति ही रहेगा.