पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की और उनको ईद और नवरोज की बधाई दी…
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की. इस दौरान उन्होंने ईद और नवरोज की बधाई दी. साथ ही उन्होंने समंदर में कमर्शिल रूट्स को सुरक्षित और खुला रखने पर जोर दिया जाता है.
PM Modi Talk With Iranian President: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की. उन्होंने उन्हें ईद और नौरोज़ की शुभकामनाएं दीं. दोनों नेताओं के बीच बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता व खुशहाली पर बात हुई. इस अहम कूटनीतिक वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे पर हो रहे उन हमलों की कड़ी निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन को बाधित करते हैं. साथ ही, उन्होंने नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित व खुला रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया. इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार सहयोग देने के लिए ईरानी सरकार और राष्ट्रपति की सराहना भी की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए पोस्ट किया, ‘राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से बात की और ईद और नौरोज़ की बधाई दी. हमने उम्मीद जताई कि यह त्योहारों का मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और खुशहाली लाएगा. इलाके में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की निंदा की, जो इलाके की स्थिरता के लिए खतरा हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट डालते हैं.’
भारतीयों की रक्षा के लिए किया धन्यवाद
प्रधानमंत्री ने इसी पोस्ट में आगे कहा, ‘नेविगेशन की आजादी की रक्षा करने और यह पक्का करने के महत्व को दोहराया कि शिपिंग लेन खुले और सुरक्षित रहें. ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के लगातार सपोर्ट की तारीफ की.’
पीएम मोदी की ‘ईद डिप्लोमेसी’: ईरान जंग के बीच बने दोस्तों के हमदर्द
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बात
प्रधानमंत्री ने अपने बातचीन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत पर बात की. उन्होंने दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी के बीच समुद्री आवाजाही (नेविगेशन) की स्वतंत्रता और शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर वकालत की. साथ ही साथ-साथ खाड़ी देशों में बुनियादी ढांचे पर हुए उन हमलों की कड़ी निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं. इसकी वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (ग्लोबल सप्लाई चेन) को बुरी तरह बाधित करते हैं. समुद्री व्यापारिक मार्गों को हर हाल में खुला और सुरक्षित रखने की अहमियत पर जोर दिया.