धूप में तपन से सीजन में पहली बार 40 डिग्री पार हुआ पारा, आज से लू का अलर्ट…
जिले में बादलों का दबाव रुकते ही गर्मी ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। धूप की तपन के कारण बुधवार को सीजन में पहली बार अधिकतम तापमान 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया।
इसके साथ ही सड़क पर दूर से पानी जैसा चमकता हुआ दृश्य (मृगमरीचिका) दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार जिला अब भीषण गर्मी के डबल अटैक की तैयारी में है। अगले 48 घंटे में तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने और 17 अप्रैल से लू (हीट वेव) चलने की संभावना है। पश्चिमी हवाओं के कारण बुधवार को अधिकतम तापमान करीब एक डिग्री बढ़ गया। पिलानी में यह 40.2 डिग्री व न्यूनतम 20 डिग्री दर्ज किया गया। इससे पहले मंगलवार को अधिकतम 39.3 डिग्री दर्ज किया गया था।
रात को भी भारी उमस रहेगी : मई के शुरूआती सप्ताह में ही तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच जा सकता है। दूसरे व तीसरे सप्ताह में पारा 45 डिग्री के ऊपर जाने की संभावना है। नौतपा यानी 25 मई से अगले नौ दिन न केवल दिन तपेंगे, बल्कि रात का तापमान भी 25 से 30 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। यानी रात को भी भारी उमस और बेचैनी रहेगी। जयपुर मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि आगामी एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा। इस दौरान 17 व 18 अप्रैल को लू (हीट वेव) चलने की संभावना है। पश्चिमी शुष्क हवाओं के कारण 20 अप्रैल तक पारा 43 डिग्री तक पहुंच सकता है। मौसम शुष्क रहने व नमी कम होने से दिन की धूप की तपन बढ़ने लगी है। इसके साथ ही गर्म हवा के दबाव से जिले में भीषण गर्मी का असर तेज हो गया है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अब बादलों का दबाव कम रहेगा। मौसम शुष्क रहने, वातावरण में नमी कम होने व पश्चिमी गर्म हवा के दबाव के साथ गर्मी का असर बढ़ेगा। भीषण गर्मी के कारण इस साल मई का महीना पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
मृगमरीचिका बनने का कारण : मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तेज गर्मी से सड़क बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है। सड़क के ठीक ऊपर की हवा भी गर्म होकर हल्की हो जाती है। जबकि उससे ऊपर की हवा अपेक्षाकृत ठंडी और घनी रहती है। इस तरह हवा की परतों में तापमान का अंतर बन जाता है। इस दौरान दूर से आने वाली प्रकाश की किरण इन अलग-अलग तापमान वाली हवा की परतों से गुजरती है, तो उसमें बदलाव होता है। जिससे लगता है कि सड़क पर पानी जमा है। मृग का मतलब होता है हिरण और मरीचिका का मतलब होता है भ्रम। माना जाता है कि रेगिस्तान में हिरण दूर से पानी समझकर इस भ्रम के पीछे दौड़ते हैं, इसलिए इसे मृगमरीचिका कहा जाता है।