June 5, 2026

रिसाली में 30 लाख के स्वर्ग रथ पर उठे सवाल, विधायक जांच कराकर दिखाएं: चुम्मन देशमुख

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रिसाली। नगर निगम रिसाली द्वारा सीएसआर मद से खरीदे गए करीब 30 लाख रुपए के नए स्वर्ग रथ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रमुख समाचार में प्रकाशित खबर के बाद कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद चुम्मन देशमुख ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि वर्तमान विधायक ललित चंद्राकर में इंसानियत है तो पूरे मामले की जांच बिठाकर सच्चाई जनता के सामने लाएं।

 

देशमुख ने आरोप लगाया कि सीएसआर मद की राशि का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधा देना था, लेकिन जिस स्वर्ग रथ को खरीदा गया, उसी की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जिस वाहन में सम्मानपूर्वक शव ले जाने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, उसी वाहन के आकार और डिजाइन को लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं।उन्होंने कहा कि प्रमुख समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार वाहन को लेकर तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं और जनप्रतिनिधियों को जानकारी मिलने के बाद वाहन को निगम मुख्यालय से हटाकर सम्भवत सुधार के लिए भेजा गया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि वाहन पूरी तरह मानक अनुरूप था तो उसे सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी।

 

चुम्मन देशमुख ने कहा कि यह केवल एक वाहन की खरीद का मामला नहीं है, बल्कि मृतकों की गरिमा और जनता के पैसों से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएसआर मद के पैसे में भी बंदरबांट की आशंका दिखाई दे रही है और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि निम्न बिंदुओं पर जवाब दिया जाए—

* 30 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी विवादित स्वर्ग रथ क्यों खरीदा गया?

* वाहन की तकनीकी जांच किस अधिकारी ने की?

* भुगतान से पहले गुणवत्ता परीक्षण हुआ था या नहीं?

* यदि वाहन में खामियां थीं तो भुगतान किस आधार पर किया गया?

* वाहन को मुख्यालय से हटाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया?

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि रिसाली की जनता जवाब चाहती है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने विधायक ललित चंद्राकर से आग्रह किया कि वे मामले को गंभीरता से लें और जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।

 

देशमुख ने तंज कसते हुए कहा कि यदि करोड़ों की योजनाओं और विकास कार्यों के दावे किए जा रहे हैं, तो कम से कम अंतिम यात्रा के लिए खरीदा गया स्वर्ग रथ तो मानक अनुरूप होना चाहिए। जनता के पैसे से खरीदी गई सुविधा पर सवाल उठना स्वयं में गंभीर विषय है।

 

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।

 

मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि नगर निगम रिसाली में वर्तमान में संचालित एकमात्र स्वर्ग रथ में भी खरीद के समय इसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आई थी। उस दौरान वाहन में शव रखने और संचालन संबंधी व्यावहारिक दिक्कतों की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद उसमें आवश्यक बदलाव और संशोधन कर उसे उपयोग के योग्य बनाया गया था।

 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब निगम प्रशासन के पास पहले से इस प्रकार की खामियों का अनुभव और रिकॉर्ड मौजूद था, तब नए स्वर्ग रथ की खरीदी के दौरान वही गलती दोबारा कैसे दोहरा दी गई? क्या वाहन की तकनीकी जांच और भौतिक परीक्षण नहीं किया गया, या फिर सभी तथ्यों को नजरअंदाज कर वाहन को स्वीकृति दे दी गई?