EPFO ने 74, 50 और 31 साल पुरानी योजनाओं को किया अपडेट, पेंशन में हुए बड़े बदलाव; कटता है PF, तो जानना जरूरी…
- EPFO News: ईपीएफओ ने अपनी तीन पुरानी योजनाओं को ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता’ के तहत अपडेट किया है, जिनमें ‘कर्मचारी पेंशन योजना, 2026’ प्रमुख है।
- EPFO ने 3 पुरानी योजनाओं को ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता’ के तहत अपडेट किया
- पेंशन क्लेम का निपटारा अब 20 दिनों में होगा।
- देरी से क्लेम पर 12% ब्याज का प्रावधान।
- नियोक्ताओं के लिए डिजिटल अनुपालन अनिवार्य किया गया।
नई दिल्ली। अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता है तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने 3 योजनाओं को अपडेट किया है। इन योजनाओं में से एक योजना 74 साल पुरानी है। एक 31 साल पुरानी और एक 50 साल पुरानी है। इन तीनों योजनाओं को ‘सोशल सिक्योरिटी कोड’ के तहत अपडेट करके नया रूप दिया गया है।
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ‘कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 2026’ को नोटिफाई किया है। यह ‘EPF स्कीम, 1952’ की जगह एक नया फ्रेमवर्क लाएगी, जिससे पैसे निकालने के नियम आसान होंगे, डिजिटल कंप्लायंस मजबूत होगा और छूट प्राप्त प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट के लिए गवर्नेंस के कड़े नियम लागू होंगे।
एम्प्लॉईज पेंशन स्कीम, 2026 ने एम्प्लॉईज पेंशन स्कीम, 1995 और एम्प्लॉईज फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 की जगह ले ली है। यह नई योजना अब ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020’ का हिस्सा है और 29 जून, 2026 से लागू हो गई है।
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नई EPS पेंशन स्कीम में पेंशन फॉर्मूला, कर्मचारी और नियोक्ता का योगदान और कम से कम पेंशन जैसे कुछ नियम पहले जैसे ही रहेंगे। हालांकि, पेंशन प्रोसेसिंग, पेंशन फंड के निवेश के तरीके और एक नए नियम जैसे कुछ पहलुओं में बदलाव किए गए हैं। इस नए नियम के तहत, अगर EPFO बिना किसी ठोस वजह के क्लेम में देरी करता है, तो 12% ब्याज दिया जाएगा।
जो कर्मचारी पहले ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम, 1995’ के सदस्य रहे हैं, या जो इस नई स्कीम के शुरू होने से पहले ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम, 1995’ या ‘एम्प्लॉइज फैमिली पेंशन स्कीम, 1971’ के सदस्य बनने के योग्य थे, वे भी नई EPS पेंशन स्कीम में शामिल होने के पात्र हैं।
क्या EPS-2026 के तहत EPS योगदान का तरीका बदला है?
नई EPS-2026 स्कीम के तहत पीएफ में योगदान के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से वेतन का 12 प्रतिशत अनिवार्य योगदान बना हुआ है। नोटिफाई किए गए संस्थानों के लिए मौजूदा 10 प्रतिशत की दर लागू रहेगी। सरकार ने वैधानिक वेतन सीमा का ढांचा भी बनाए रखा है, जिसका मतलब है कि अनिवार्य योगदान केंद्र द्वारा नोटिफाई की गई वेतन सीमा से जुड़े रहेंगे।
वहीं अगर बात करें इम्प्लॉय पेंशन स्कीम की तो इसके योगदान की प्रक्रिया में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। एम्प्लॉयर (नियोक्ता) तय वेतन सीमा के आधार पर कर्मचारी के वेतन का 8.33% योगदान देना जारी रखेंगे। सरकार भी वेतन सीमा के आधार पर कर्मचारी के वेतन का 1.16% योगदान देना जारी रखेगी।
EPS-2026 के मुख्य बदलाव
पेंशन क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर होगा।
देरी से होने वाले क्लेम पर 12% ब्याज मिलेगा।
स्कीम में ज्यादा पेंशन के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
सरकारी योगदान पर न्यूनतम रिटर्न मिलेगा।
एम्प्लॉयर्स के लिए डिजिटल कंप्लायंस जरूरी होगा।
स्कीम का नाम ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम, 1995’ से बदलकर ‘एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम, 2026’ कर दिया गया है।