23वें दिन भी नहीं थमा अतिथि शिक्षकों का आंदोलन: 24 जिलों से पहुंचे 1600 शिक्षक, नियमितीकरण और संविलियन की मांग पर अड़े…
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। प्रदेश के 24 जिलों से आए करीब 1600 अतिथि शिक्षक पिछले 23 दिनों से दुर्ग के पटेल चौक के समीप अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारी “एक समान काम, एक समान वेतन”, नियमितीकरण और संविलियन की एकसूत्रीय मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
धरने पर बैठे शिक्षकों का आरोप है कि दूसरे जिलों से आंदोलन में शामिल होने के लिए आने वाले अतिथि शिक्षकों को रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से पुलिस द्वारा रोककर हिरासत में लिया जा रहा है। कई स्थानों पर शिक्षकों को डिटेन कर धरनास्थल तक पहुंचने से रोका जा रहा है। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। वही कई शिक्षक गर्भवती है उनके साथ छोटे छोटे बच्चे कई दूरी जिलो से आकर धरना स्थल में बैठे है।
11 वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा, फिर भी सम्मानजनक वेतन नहीं –अन्नपूर्णा पांडे
हमारे संवाददाता से बातचीत में छत्तीसगढ़ राज्य अतिथि शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा पांडे ने कहा कि प्रदेश के अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से बस्तर सहित नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, लेकिन आज भी उनका भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक व्याख्याता स्तर का कार्य करते हैं, जहां नियमित व्याख्याताओं को 70 से 80 हजार रुपये तक वेतन मिलता है, वहीं अतिथि शिक्षकों को केवल करीब 20 हजार रुपये में सीमित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि गर्मी की छुट्टियों में कार्य लेने के बावजूद उसका वेतन नहीं दिया जाता।
अन्नपूर्णा पांडे ने आरोप लगाया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और शिक्षक केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा की स्थिति नहीं है, फिर भी प्रशासन द्वारा रात में धरनास्थल के टेंट हटाए गए तथा विभिन्न स्थानों पर रुके शिक्षकों की जांच कर उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक और छोटे-छोटे बच्चों के साथ परिवार भी मौजूद हैं, जो पूरी रात परेशान रहे। उन्होंने कहा कि सरकार से ऐसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी और सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनना चाहिए।
“एक ही मांग है, नियमितीकरण और संविलियन” – रानी
वहीं कोरिया जिला अतिथि शिक्षक संघ की जिला अध्यक्ष रानी ने कहा कि आंदोलन का आज 23वां दिन है और उनकी केवल एक ही मांग है—नियमितीकरण एवं संविलियन।
उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों से पूरी तरह अवगत है, लेकिन समाधान निकालने के बजाय अन्य कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपील करते हुए कहा कि यदि उनकी एकसूत्रीय मांग पूरी कर दी जाए तो सभी अतिथि शिक्षक तत्काल अपने-अपने विद्यालयों में लौटकर कर्तव्य पालन शुरू कर देंगे।
रानी ने कहा कि अतिथि शिक्षक वर्षों से कठिन परिस्थितियों में, विशेषकर बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी बच्चों को शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि
11 वर्षों की सेवा के बाद भी केवल 10 माह का लगभग 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलना क्या न्यायसंगत है?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है तो अतिथि शिक्षकों की मांगों का शीघ्र समाधान करना चाहिए, ताकि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
फिलहाल अतिथि शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

