भिलाई निगम मुख्यालय के सामने 24 लाख 63 हजार की सीमेंटीकरण सड़क में फिर दरारें…
- ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों व सब इंजीनियर पर कार्रवाई की मांग
भिलाई। नगर निगम मुख्यालय के सामने 24 लाख 63 हजार रुपये की लागत से कराए गए सीमेंटीकरण सड़क निर्माण कार्य में फिर से जगह-जगह दरारें आने लगी हैं। सड़क में दोबारा दरारें आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की ऐसी स्थिति सामने आने पर जनता में नाराजगी है।
जनता युवा कांग्रेस जे के दुर्ग संभाग अध्यक्ष अनुरुध वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 24 लाख 63 हजार रुपये की लागत से तैयार सड़क में इतनी जल्दी दरारें आना निर्माण की गुणवत्ता और कार्य की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अनुरुध वर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व में किए गए इस कार्य में भारी भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, सड़क की गुणवत्ता, निर्माण की माप एवं भुगतान सहित पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जांच में यदि निर्माण कार्य में गड़बड़ी या गुणवत्ता से समझौता पाया जाता है तो जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी एवं गुणवत्ता की जिम्मेदारी निभाने वाले संबंधित निगम अधिकारियों और सब इंजीनियर पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अनुरुध वर्मा ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसों से होने वाले विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। 24 लाख 63 हजार रुपये की राशि से बने सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो दोषियों से जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थल निरीक्षण एवं तकनीकी जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार, अधिकारियों और सब इंजीनियर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।