विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की पूर्व संध्या पर “वरिष्ठजन कल्याण महासंघ” का गरिमामय आयोजन संपन्न : 5 वरिष्ठ साहित्यकार “वरिष्ठजन साहित्य शिरोमणि सम्मान” से हुए सम्मानित …
- “वरिष्ठजन : अनुभव की पूंजी और समाज की अमूल्य धरोहर” विषय पर सार्थक संगोष्ठी आयोजित
- “वरिष्ठजन बोझ नहीं, समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, ज्ञान और संस्कार नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं” – घनश्याम देवांगन
भिलाई। वरिष्ठजनों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों के समग्र कल्याण के लिए समर्पित बहुआयामी संस्था “वरिष्ठजन कल्याण महासंघ” के तत्वावधान में विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की पूर्व संध्या पर सियान सदन, हाउसिंग बोर्ड, भिलाई में गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में वरिष्ठजनों के सम्मान, साहित्य, संगीत, योग एवं आत्मरक्षा जैसे विविध कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से समाज में वरिष्ठजनों की महत्ता को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। महासंघ के पदाधिकारियों ने मंचस्थ अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में मंच पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा, आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा, डॉ. डी.पी. देशमुख, डॉ. नीलकंठ देवांगन, हेमलाल साहू ‘निर्मोही’, महासंघ अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन, कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता एवं कांतिलाल विश्वकर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
* वरिष्ठजन : अनुभव की पूंजी और समाज की अमूल्य धरोहर
इस अवसर पर आयोजित वैचारिक संगोष्ठी का विषय “वरिष्ठजन : अनुभव की पूंजी और समाज की अमूल्य धरोहर” था। संगोष्ठी का आधार वक्तव्य महासंघ के अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “वरिष्ठजन बोझ नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके जीवन का अनुभव, ज्ञान, संस्कार और संघर्ष नई पीढ़ी के लिए अनमोल मार्गदर्शक है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज वरिष्ठजनों को केवल सम्मान तक सीमित न रखकर उनकी प्रतिभा, अनुभव और क्षमता का सकारात्मक उपयोग करे।” उन्होंने कहा कि वरिष्ठजन कल, आज और आने वाली पीढ़ी के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उनके अनुभवों को युवाओं से जोड़कर एक सशक्त, संस्कारित और संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।
* पांच साहित्यकारों को मिला “वरिष्ठजन साहित्य शिरोमणि सम्मान”
समारोह में हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य में उल्लेखनीय एवं दीर्घकालीन योगदान के लिए पांच वरिष्ठ साहित्यकारों—डॉ. परदेशी राम वर्मा, आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा, डॉ. डी.पी. देशमुख, डॉ. नीलकंठ देवांगन एवं श्री हेमलाल साहू ‘निर्मोही’ को “वरिष्ठजन साहित्य शिरोमणि सम्मान” से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र एवं पेन भेंट किया गया। वहीं तीन तीन आपरेशन एवं स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के बावजूद अपनी सक्रियता, जीवटता एवं बुलंद हौसले से समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने कांतिलाल विश्वकर्मा को “वरिष्ठजन विशिष्ट गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने इस साल 75 वर्ष की उम्र में इग्नू से इंडस्ट्रियल सेफ्टी में एम एस सी की परीक्षा दी है।
इसके अतिरिक्त समारोह में 80 वर्ष से अधिक आयु के 18 वरिष्ठ नागरिकों का अंगवस्त्र, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठजनों के चेहरे पर सम्मान और आत्मीयता की खुशी स्पष्ट दिखाई दी।
* दो नई पुस्तकों का हुआ विमोचन
समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीलकंठ देवांगन की दो नई पुस्तकों “अंतस के पीरा” एवं “छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल” का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए अतिथियों ने पुस्तकों को समाज और नई पीढ़ी के लिए उपयोगी बताया।
* गीत-संगीत से सजा समारोह
कार्यक्रम में गायक जोसफ की अगुवाई में वरिष्ठजनों की विशेष सहभागिता से आकर्षक गीत-संगीत की प्रस्तुति दी गई। वरिष्ठजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए समारोह में उल्लास और जीवंतता भर दी।
* युवाओं के मार्शल आर्ट प्रदर्शन ने मोहा मन
अभिषेक मार्शल आर्ट एवं स्पोर्ट्स एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने आत्मरक्षा की तकनीकों पर आधारित रोमांचक मार्शल आर्ट प्रदर्शन किया। युवाओं के अनुशासन, साहस एवं कौशल से भरपूर प्रदर्शन को उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा। प्रदर्शन ने विशेष रूप से आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
* वरिष्ठ महिलाओं ने प्रस्तुत किया योगा पिरामिड
समारोह का एक विशेष आकर्षण 70 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठ महिलाओं द्वारा योग एवं पिरामिड फॉर्मेशन का प्रदर्शन रहा। उम्र को पीछे छोड़ते हुए वरिष्ठ महिलाओं के आत्मविश्वास, शारीरिक सक्रियता और सामूहिक समन्वय ने सभी को प्रभावित किया। उनके प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि उम्र जीवन की सक्रियता में बाधा नहीं, बल्कि अनुभव और आत्मविश्वास के साथ नई ऊर्जा का अवसर है।
* साहित्यकारों ने बताया वरिष्ठजनों को समाज का मार्गदर्शक
संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने वरिष्ठजनों के अनुभवों को समाज की अमूल्य पूंजी बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को उनसे निरंतर सीखने और संवाद करने की आवश्यकता है।
आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वरिष्ठजन कल्याण महासंघ ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ मातृशक्ति एवं युवा शक्ति सहित समाज के सभी वर्गों को जोड़कर सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को पीढ़ियों के बीच संवाद और आपसी सम्मान बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. डी.पी. देशमुख ने कहा कि वरिष्ठजनों का सम्मान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों के प्रति सम्मान भी है। उन्होंने वरिष्ठजनों के अनुभवों को समाज के विकास में उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कला परंपरा की पुस्तकें महासंघ को भेंट की।
समारोह को डॉ नीलकंठ देवांगन, हेमलाल साहू निर्मोही, मंगलूराम देवांगन, कांतिलाल विश्वकर्मा, एन एल मौर्य ‘प्रीतम’ ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि वरिष्ठजन युवा पीढ़ी को अपने जीवन अनुभव का ज्ञान और संस्कार देकर श्रेष्ठ नागरिक बनाने निरंतर प्रयासरत रहें।
* नशामुक्त समाज के लिए सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित वरिष्ठ महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने नशे के विरुद्ध जनजागरण एवं नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया। महासंघ ने समाज के सभी वर्गों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ एवं संस्कारित समाज के निर्माण में सहभागिता का आह्वान किया।
समारोह में महासंघ अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन, कोषाध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्ता, जोसफ, श्रीमती सुमन देवांगन, छाया विश्वकर्मा, जयति साहू, अर्चना मूले, शैलजा वार्ष्णेय, तृप्ति नंदी, लावण्य डे, मंदा वासनकर, शोभा गूजर, ललिता श्रीवास, कमलेश वर्मा, मोरध्वज चंद्राकर, हुकुमचंद देवांगन, एन.एल. मौर्य प्रीतम, एस के नंदी, कृष्ण राव गूजर, हरीश कुमार देवांगन, हेल्पेज इंडिया के अजय सिंह, मुकेश कुमार, राजेन्द्र वार्ष्णेय, डी.ए. करमाकर, रतनलाल गोयल, रामायण मिश्रा, एम आर निराला, ओमप्रकाश साहू, राम बोरकर, घनश्याम अग्रवाल, अभिषेक टंडन सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के पदाधिकारी, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुमन देवांगन एवं छाया विश्वकर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन कांतिलाल विश्वकर्मा ने किया।
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