- हुडको संघर्ष समिति ने नजूल अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
भिलाई। आमदी नगर हुडको के निवासियों को नजूल पट्टा निष्पादन और पंजीयन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए ‘हुडको संघर्ष समिति’ के संरक्षक अधिवक्ता रविशंकर सिंह और संयोजक जावेद खान ने नजूल अधिकारी प्रफुल्ल कुमार गुप्ता नजूल शाखा दुर्ग को एक ज्ञापन सौंपते हुए इस ओर ध्यान आकर्षित कराया है कि वर्ष 2008 से पूर्व हुडको क्षेत्र भिलाई इस्पात संयंत्र (बी एस पी) के अधीन था। हुडको के प्रत्येक आवासधारक ने भिलाई इस्पात संयंत्र को संपूर्ण राशि का भुगतान कर अपना आवास क्रय किया था। परिस्थिति वश वर्ष 2008 में हुडको की 70.01 हेक्टेयर भूमि को नजूल के अंतर्गत लाकर प्रत्येक आवासधारक को पट्टा लेने के लिए बाध्य किया गया, जिस पर दीर्घकाल तक उच्च न्यायालय का स्थगनादेश (स्टे) भी प्रभावी रहा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्रालय द्वारा जारी आदेश दिनांक 18/02/2022 के पश्चात पट्टा निष्पादन की कार्यवाही पुनः प्रारंभ हुई है।निवासियों को राहत प्रदान करने तथा प्रक्रिया को त्वरित व सुलभ बनाने के लिए समिति के संयोजक जावेद खान ने कुछ प्रमुख मांगें प्रस्तुत की हैं जैसे मूल आबंटियों के पट्टे का पंजीयन नियमानुसार धारा 35 के तहत ही किया जाए। यदि भविष्य में पट्टाधारक उस आवास या पट्टे का विक्रय करता है, केवल उसी स्थिति में धारा 23 (विक्रय विलेख) के तहत निर्धारित गाइडलाइन मूल्य पर स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क देय होना चाहिए,वारिसानों के लिए एकल पेशी में बयान: अधिकांश मूल आबंटियों का स्वर्गवास हो चुका है और वर्तमान में उनके वारिसान समिति के प्रोत्साहन पर प्रक्रिया पूरी कराने आ रहे हैं। सभी वारिसों का बार-बार एक साथ उपस्थित होना अत्यंत कठिन है। अतः धारा 18-4 के समय एक ही पेशी में सभी के बयान दर्ज कर प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
सूचना तंत्र का आधुनिकीकरण करते हुए पेशी और सुनवाई की अगली तारीखों की जानकारी आवेदकों को मोबाइल नंबर पर मैसेज के माध्यम से भेजी जाए।समयबद्ध निष्पादन: पट्टा निष्पादन की पूरी प्रक्रिया को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाए।
भुइयां ऑनलाइन पोर्टल पर तत्काल प्रविष्टि: पट्टा निष्पादन एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई हितग्राहियों का नाम ‘भुइयां’ ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाया है। इसे अविलंब पोर्टल पर अद्यतन (अपडेट) किया जाए। *पट्टेधारक द्वारा आवास विक्रय करने की स्थिति मे अगर इकरारनामे की राशि पंजियन विभाग द्वारा प्रस्तुत मुलयांकन प्रतिवेदन से कम आती है तो पूर्व की तरह ही क्रेता से शपथ पत्र ले कर विक्रय की अनुमति प्रदान की जाए, नही तो अकारण ही क्रेता और विक्रेता को दो इकरारनामे बनाने पड़ते हैं जो की सैद्धांतिक रूप से गलत है*,हुडको संघर्ष समिति ने नजूल अधिकारी से आग्रह किया है कि इन जनहितकारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आम नागरिकों को राहत प्रदान की जाए, ताकि वर्षों से लंबित पट्टा निष्पादन का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके। इस अवसर पर समिति के आर बी के राव,बी एल मालवीय,अरूण ठवकर,मो जावेद, सी अनिल,जय प्रकाश सिन्हा आदि उपस्थित थे।


