April 4, 2025

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न एक दण्डनीय अपराध

IMG-20241210-WA0004

 

अनवर हुसैन सुकमा

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण छत्तीसगढ़ बिलासपुर के आदेशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष विजय कुमार होता के मार्गदर्शन में तालुका विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष गितेश कुमार कौशिक के द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभा-कक्ष में कार्यस्थल यौन उत्पीड़न रोकथाम और निपटारा के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में पुलिस विभाग के महिला कर्मचारी, अधिकारी सहित महिला बाल विकास विभाग में कार्यरत महिलाएं एवं अन्य शासकीय कार्यालय में कार्यरत महिलाएं उपस्थित थीं। कार्यशाला में गितेश कुमार कौशिक ने आपराधिक कानून के तहत् घरेलू हिसा से निपटने के संबंध में उपायों के साथ ही भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 85 के संबंध में एवं यौन उत्पीड़न के संबध में जागरूकता एवं इस हेतु कानूनी प्रावधान के संबंध में सरल एवं विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि पति या पत्नी के रिश्तेदारों द्वारा शारीरिक या मानसिक रूप से कोई क्रूरता की जाती है अथवा महिला के जीवन अंग या स्वास्थ्य को गंभीर चोट या खतरा हो सकता है। दहेज की मांग को पूरा करने के लिए महिला को मजबूर करने के उद्धेश्य से उसके उत्पीड़न भी शामिल है। घरेलू हिंसा की घटना सार्वजनिक क्षेत्र में काफी हद तक अदृश्य बनी हुई है, को संबोधित करने के लिए सरकार ने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित करने एवं उन्हें अन्य राहत प्रदान करने के लिए एक नागरिक उपाय के रूप में दिनाँक 14.09.2005 को घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 को अधिसूचित करते हुए यह अधिनियम 26.10.2006 से लागू हुआ है। संवैधानिक जन आदेश को कायम रखने के लिए राज्य में समान अधिकार सुनिश्चित करने सामाजिक भेदभाव और विभिन्न प्रकार की हिंसा और हत्याचारों का मुकाबला करने तथा विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं को सहायता सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न विधायी लागू किये हैं। भारत की संविधान न केवल महिलाओं को समानता प्रदान करता है, बल्कि राज्य को
महिलाओं को सामने आने वाले सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक नुकसान को बेअसर करने के लिए महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव के उपाय अपनाने का भी अधिकार देता है। अनुछेद 14 पुरूषों और महिलाओं को राजनीतिक और आथिक व सामाजिक क्षेत्रों में समान अवसर एवं अधिकार प्रदान करता है। अनुछेद 15 धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी भी नागरिक के खिलाफ भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। इसी तरह अनुछेद 16 सभी नागरिकों के लिए सार्वजनिक नियुक्तियों के मामलें में अवसर की समानता प्रदान करता है। अनुछेद 39 सी समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित् करता है। कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न कानून के अनुसार महिलाएं यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है। यौन उत्पीड़न का दायरा काफी व्यापक है। जिसमें विभिन्न कार्य स्थलों यानि सरकारी, निजी, शैक्षिणक संस्थानों और घरों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षा की गारण्टी देता है। उत्पीड़न को कई तरीके से दण्डित किया जा सकता है, जैसे दूसरे कार्यालय में स्थानांतरण करने, वेतन वृद्धि/पदोन्नति रोकने, वेतन काटने, मौद्रिक मुआवजा देने अथवा उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है। इसके अलावा न्यायाधीश द्वारा टोनही प्रताड़ना अधिनियम, दहेज प्रताड़ना अधिनियम, लैंगिक अपराध एवं भरण-पोषण अधिनियम से संबंधित जानकारी विस्तार से दी गई। इस कार्यशाला में पुलिस अनुविभागीय अधिकारी परमेश्वर तिलकवार, अधिवक्ता कैलाश जैन एवं सूबेदार विकास कुमार उपस्थित रहे।