मोदी की गारंटी: राहत नहीं, सितम – बिजली दरों ने तोड़ी जनता की कमर
दुर्ग: छत्तीसगढ़ की जनता पर केन्द्र की मोदी सरकार और प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार ने इस माह बिजली दरों का बोझ लाद दिया है। वन नेशन वन टैरिफ के एजेंडे को पूरा करने के नाम पर छत्तीसगढ़ में इस माह से बिजली की दरो मे बढ़ोतरी के साथ साथ घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट भी समाप्त कर दी गई है जिससे की सितम्बर माह का बिजली का बिल भारी-भरकम बढ़ कर आ गया है इसी के साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार ने अभी जोनवार उपभोक्ता शिकायत फोरम बना दिया है और आगे चल कर जिले वार अध्यक्ष बनाए जाएंगे जिसका खर्चा भी बिजली उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा, प्रत्येक जोन अध्यक्ष का तीन साल का कार्यकाल उनका मानदेय,आफिस,वाहन इत्यादि का खर्चा भी बिजली विभाग को ही वाहन करना होगा और बहुत संभव है की इसी वर्ष बिजली के दरे फिर बढाना पड़े।
भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2019 में जनता को राहत देते हुए चार सौ यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू की थी। यह योजना कोरोना काल और लॉकडाउन जैसी कठिन परिस्थितियों में भी जारी रही, जिससे आम जनता को भारी आर्थिक लाभ हुआ और घर-परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में सहारा मिला।
लेकिन आज भाजपा की सरकार ने इस योजना को 400 यूनिट से घटाकर मात्र 100 यूनिट तक सीमित कर दिया है। इतना ही नहीं, इसमें यह शर्त भी जोड़ दी गई है कि यदि खपत 100 यूनिट से एक यूनिट भी अधिक हो गई, तो उपभोक्ता को कोई छूट नहीं मिलेगी, अब अगर धरातल पर देखा जाए तो आज के इस इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल युग मे सभी घरेलू उपयोग की वस्तुएं बिजली से चलती है तो इस हिसाब से बिजली की खपत तो गरीब के घर में भी बढ़ गई है तो इसका लाभ आखिर किस को मिलेगा हो सकता है कि ये टार्च की रौशनी में ढूंढना पड़ेगा की आखिर इसका लाभार्थी है कौन,?बढ़ती हुई जरूरतों को देखते हुए यह योजना आम गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए लगभग बेकार साबित हो रही है।
जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर इस निर्णय का लाभ किसे मिलेगा? क्या गरीबों और आम लोगों को राहत देने की बजाय उन्हें और मुश्किलों में धकेलना ही भाजपा सरकार की “मोदी की गारंटी” है?
साफ है कि मोदी की गारंटी राहत नहीं, बल्कि सितम बनकर छत्तीसगढ़ की जनता पर टूट रही है। बिजली जैसी आवश्यक जरूरत की दरें बढ़ाकर और 400 यूनिट तक की योजना को खत्म कर भाजपा ने यह साबित कर दिया है कि उनकी नीतियां सीधे-सीधे जनता विरोधी हैं।