धमतरी में ‘काला हीरा’ मखाना खेती की शुरुआत — महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका का नया भविष्य…
- धान के कटोरे धमतरी में आधुनिक तकनीक के साथ सुपर फूड मखाना की खेती का विस्तार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
- महिला स्वसहायता समूहों द्वारा पोखरों में मखाना पौधरोपण की पहल; कलेक्टर अबिनाश मिश्रा और कृषि वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी मार्गदर्शन
धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध धमतरी जिला अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है। परंपरागत फसलों के साथ–साथ यहां अब सुपर फूड के रूप में प्रसिद्ध मखाना, जिसे ‘काला हीरा’ भी कहा जाता है, अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है। पोषण, स्वास्थ्य और बाजार मूल्य—तीनों मोर्चों पर श्रेष्ठ माने जाने वाले मखाने की खेती को जिले में आजीविका के नए मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं।
19 मार्च 2025 को किसान सम्मान निधि वितरण कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस महत्वपूर्ण घोषणा ने राज्य में मखाना उत्पादन के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए। इसी को आगे बढ़ाते हुए धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने जिले में मखाना खेती को प्रोत्साहित करने और इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने का संकल्प लिया है।
इसी कड़ी में ग्राम देमार के शैलपुत्री महिला स्वसहायता समूह तथा नई किरण महिला स्वसहायता समूह ने ग्राम डांडेसरा में राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के किनारे स्थित छोटे–छोटे पोखरों में मखाना पौधरोपण कर इस नई पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम महिला समूहों के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक उन्नति की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगा।
शुभारंभ के दौरान कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, उप संचालक उद्यानिकी श्रीमती पूजा कंवर साहू, उप संचालक कृषि श्री मोनेश साहू और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर उपस्थित रहे। कलेक्टर ने मखाना खेती के लिए पोखरों को उपयुक्त बनाने हेतु आवश्यक दिशा–निर्देश दिए और महिला समूहों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर ने महिला समूहों को मखाना उत्पादन की तकनीकी जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि मखाना धमतरी जिले में रोजगार बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और खेत–तालाब आधारित आजीविका में विविधता लाने की अपार संभावनाएँ रखता है।
यह पहल न केवल धमतरी की ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि जिले में वैकल्पिक कृषि आधारित आजीविका को नया आयाम भी प्रदान करेगी। मखाने जैसी उच्च मूल्य वाली फसल का स्थानीय स्तर पर उत्पादन जिले के किसानों और महिला समूहों के लिए आर्थिक क्रांति साबित हो सकता है।

