June 5, 2026

देश की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी में 35 दिन के लिए हो सकती है शटडाउन, 6000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर क्या होगा असर?

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देश की दूसरी सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी, Nayara एनर्जी, अप्रैल की शुरुआत से लगभग 35 दिनों के लिए अपने ऑपरेशन को बंद करने की योजना बना रही है। इस मेंटेनेंस शटडाउन के कारण भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 8% हिस्सा अस्थायी रूप से कम हो जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

एक तरफ जहाँ मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को $103 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है, वहीं भारत के घरेलू ईंधन बाजार के लिए एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। देश की दूसरी सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी, नायरा एनर्जी (Nayara Energy), गुजरात के वाडिनार स्थित अपने प्लांट को 35 दिनों के लिए पूरी तरह बंद करने की योजना बना रही है। यह शटडाउन रिफाइनरी के नियमित रखरखाव (Maintenance) के लिए किया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने बाजार विशेषज्ञों और पेट्रोल पंप डीलरों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

8% रिफाइनिंग क्षमता पर पड़ेगा सीधा असर

नायरा एनर्जी की इस रिफाइनरी की क्षमता सालाना 2 करोड़ टन कच्चा तेल साफ करने की है, जो भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 8% हिस्सा है। 35 दिनों तक उत्पादन ठप रहने का मतलब है कि बाजार में पेट्रोल और डीजल की आवक में बड़ी कमी आ सकती है। नायरा एनर्जी देश के 6,300 से अधिक पेट्रोल पंपों को ईंधन सप्लाई करती है। ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल पम्पों की मुसीबत बढ़ सकती है, रिफाइनरी का यह शटडाउन मार्च के अंत से शुरू होकर अप्रैल तक चलने की उम्मीद है।

मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई मुश्किल

आमतौर पर रिफाइनरी के शटडाउन के दौरान तेल कंपनियां पहले से स्टॉक जमा कर लेती हैं या दूसरी कंपनियों से तेल खरीदकर सप्लाई बनाए रखती हैं। लेकिन इस बार चुनौती दोगुनी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अब ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन पहले से ही दबाव में है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो निजी कंपनियों के लिए बाहर से तेल खरीदकर घरेलू बाजार में सस्ते दामों पर बेचना घाटे का सौदा साबित हो सकता है। यही कारण है कि 6000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर सप्लाई बाधित होने का डर सता रहा है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि उसके पर फ़िलहाल पर्याप्त स्टॉक हैं सप्लाई के लिए।

क्या पेट्रोल पंपों पर लगेगी लंबी कतारें?

नायरा जैसी बड़ी रिफाइनरी के 35 दिनों तक बंद रहने से पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) और बढ़ सकती है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वह शटडाउन के दौरान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है, लेकिन इतनी बड़ी क्षमता का बाजार से बाहर होना निश्चित रूप से क्षेत्रीय स्तर पर ईंधन की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।

 

सरकारी कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव

नायरा के पंपों पर सप्लाई कम होने की स्थिति में ग्राहकों का पूरा बोझ सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के नेटवर्क पर आ जाएगा। अगर सरकारी पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ती है, तो वहां भी स्टॉक जल्दी खत्म होने और लॉजिस्टिक्स की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति को सही ढंग से मैनेज नहीं किया गया, तो देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत देखने को मिल सकती है, जहाँ नायरा एनर्जी की पैठ काफी मजबूत है।

 

 

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