April 3, 2025

महा कुम्भ के दौरान श्रील प्रभुपाद को ‘विश्व गुरु’ की उपाधि से सम्मानित किया गया

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अखाड़ों ने पहली और एकमात्र बार भारत के महानतम सांस्कृतिक राजदूत को इस उपाधि से सम्मानित किया

 

10 फरवरी 2025: शुभ महा कुम्भ मेले के दौरान, इस्कॉन और विश्वव्यापी हरे कृष्ण आंदोलन के संस्थापक-आचार्य, श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा विश्व गुरु की उपाधि से सम्मानित किया गया। श्रील प्रभुपाद इतिहास में इस उपाधि को प्राप्त करने वाले पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं।

इस पावन अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, पूज्यनीय महामंडलेश्वर महंत रविंद्र पुरी जी महाराज, निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज, अवहान अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरि जी महाराज, विभिन्न अखाड़ों के अन्य महामंडलेश्वर, सचिव, वरिष्ठ संत और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

इस भव्य आयोजन में ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट के अध्यक्ष एवं मार्गदर्शक तथा इस्कॉन बैंगलोर के अध्यक्ष श्री मधु पंडित दास एवं ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट के उपाध्यक्ष एवं सह-मार्गदर्शक तथा इस्कॉन बैंगलोर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने विशेष रूप से भाग लिया।
श्रील प्रभुपाद की प्रतिमा का विशेष अभिषेक, पुष्प वर्षा, विशाल आरती एवं अन्य शुभ अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुए।

श्री मधु पंडित दास ने कहा:

*”आज मेरे लिए और पूरे इस्कॉन समुदाय के लिए यह अत्यंत हर्ष और आनंद का विषय है कि हमारे पूज्य आचार्य, श्रील प्रभुपाद को विश्व गुरु की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान श्री नित्यानंद त्रयोदशी के शुभ अवसर पर, महा कुम्भ मेला की दिव्य ऊर्जा में प्रदान किया गया।

यह हमारे लिए गौरव की बात है कि श्रील प्रभुपाद को सनातन धर्म, हमारी प्राचीन संस्कृति, और भारतीय जीवन शैली को पूरे विश्व में फैलाने के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचाया, जिससे लाखों लोगों का जीवन परिवर्तित हुआ।

मैं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, पूज्यनीय महंत रविंद्र पुरी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज और महामंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरि जी महाराज का हृदय से आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने इस दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया और श्रील प्रभुपाद को सम्मानित किया। मैं सभी संतों, श्रद्धालुओं और भक्तों को भी धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लिया।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि भगवान श्रीकृष्ण हमें और अधिक सेवा करने की शक्ति दें और सनातन धर्म की रक्षा करने का अवसर प्रदान करें।”*

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा:

*”इस धरती पर सनातन धर्म को हर घर तक पहुंचाने का कार्य केवल भगवान श्रीकृष्ण द्वारा भेजे गए एक दिव्य पुरुष, श्रील प्रभुपाद ही कर सकते थे। आज इस विश्व गुरु की उपाधि का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इसे श्रील प्रभुपाद को प्रदान किया गया है।

श्रीमद्भगवद गीता, उपनिषद और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का प्रचार-प्रसार जो पूज्य श्रील प्रभुपाद ने किया, वह केवल भगवान की कृपा से संभव हुआ। यह सम्मान बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था, जब उन्होंने पश्चिमी देशों में जाकर इस्कॉन की स्थापना की, लेकिन यह आज त्रिवेणी संगम के पावन स्थल पर होना निश्चित था।

आज इस्कॉन समुदाय ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के सनातनी इस ऐतिहासिक क्षण का जश्न मना रहे हैं। मैं श्री मधु पंडित दास जी और श्री चंचलापति दास जी के महान प्रयासों की सराहना करता हूँ और इस्कॉन बैंगलोर के सभी भक्तों को उनकी निष्ठा और समर्पण के लिए बधाई देता हूँ।”*

महंत रविंद्र पुरी जी महाराज ने कहा:

*”आज हमने जिन महान आध्यात्मिक गुरु श्रील प्रभुपाद को सम्मानित किया है, उनकी महिमा इतनी अपार है कि उन्हें ‘विश्व गुरु’ की उपाधि देना मानो सूरज को दीपक दिखाने जैसा है।

उन्होंने भगवद गीता का संदेश और वेदांत का ज्ञान आम जनता तक पहुंचाया। मैं युवाओं से आह्वान करता हूँ कि वे इस्कॉन से जुड़ें और इस महान मिशन का हिस्सा बनें।

आज इस्कॉन के 450 से अधिक मंदिर विश्वभर में फैले हुए हैं। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि हमें श्रील प्रभुपाद को यह *अभूतपूर्व सम्मान देने का सौभाग्य मिला।”

अवहान अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरि जी महाराज ने कहा:

*”जब भारत विविध चुनौतियों का सामना कर रहा था, तब श्रील प्रभुपाद ने पश्चिमी देशों में जाकर सनातन धर्म का प्रचार किया। यह एक अद्भुत और ऐतिहासिक कार्य था।

आज हम विश्व गुरु की उपाधि प्रदान कर सनातन संस्कृति के प्रसार में उनका योगदान स्वीकार कर रहे हैं। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।”*

हरे कृष्णा मूवमेंट भिलाई-रायपुर की सहभागिता

हरे कृष्ण मूवमेंट भिलाई-रायपुर, जो इस्कॉन बैंगलोर समूह का एक अभिन्न अंग है, ने भी इस ऐतिहासिक समारोह में भाग लिया।

इस मंदिर के भिलाई में सेक्टर 6 और रायपुर में वीआईपी एस्टेट, शंकर नगर में भव्य केंद्र हैं। श्री व्योमपद दास, जो भिलाई-रायपुर मंदिर के अध्यक्ष हैं, भी प्रयागराज में इस दिव्य उत्सव का हिस्सा बने।

हरे कृष्णा मूवमेंट भिलाई-रायपुर, श्रील प्रभुपाद के मिशन को आगे बढ़ाते हुए, कृष्ण भक्ति, ग्रंथ प्रचार, प्रसाद वितरण और मंदिर सेवाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण चेतना का प्रचार कर रहा है।

श्रील प्रभुपाद: जीवन और योगदान

श्रील प्रभुपाद का जन्म 1896 में कोलकाता में एक धार्मिक वैष्णव परिवार में हुआ था। उन्होंने एक आदर्श गृहस्थ जीवन जीते हुए हमेशा श्रीकृष्ण की महिमा का प्रचार किया। बाद में उन्होंने संन्यास आश्रम ग्रहण किया और गौड़ीय वैष्णव परंपरा के 32वें आचार्य बने।

69 वर्ष की आयु में, उन्होंने बिना किसी साधन के पश्चिमी देशों में श्रीकृष्ण भक्ति का प्रचार करने के लिए प्रस्थान किया। उन्होंने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु की भविष्यवाणी को साकार किया, जिसमें कहा गया था कि भगवान कृष्ण का पवित्र नाम हर गाँव और नगर में गूंजेगा।

उन्होंने भगवद गीता और श्रीमद्भागवत पुराण पर दिव्य टीकाएँ लिखीं, जिससे लाखों लोग श्रीकृष्ण चेतना से जुड़े। उन्होंने 100 से अधिक इस्कॉन मंदिरों की स्थापना की, हरिनाम संकीर्तन यज्ञ को प्रचारित किया और अन्नदान की परंपरा चलाई।

आज, विश्व गुरु के रूप में श्रील प्रभुपाद का यह सम्मान सनातन धर्म के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।

जय श्रील प्रभुपाद!
हरे कृष्ण!