Vishwakarma Jayanti 2025: विश्वकर्मा जयंती आज, जानिए शुभ पूजा मुहूर्त और महत्व…
Vishwakarma Jayanti 2025: हर वर्ष कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार सूर्यदेव 17 सितंबर को कन्या राशि में गोचर करेंगे। कन्या संक्रांति पर पुण्यकाल सुबह 05 बजकर 36 मिनट से लेकर दिन में 11 बजकर 44 मिनट तक है।
आज, 17 सितंबर 2025 को विश्वकर्मा जयंती है। हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा जयंती कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है, जिसमें सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह की यात्रा को विराम देते हुए कन्या राशि में गोचर करते हैं । इस दिन का विशेष महत्व फैक्ट्री, कारखानों और शिल्पकारों के लिए होता है, जिसमें देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने का महत्व होता है। इस दिन प्रतिष्ठानों में विशेष रूप भगवान विश्वकर्मा की पूजा और आराधना होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग लोक, लंका, द्वारिका और भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मी ने की किया था। आइए जानते हैं विश्वकर्मा पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त।
पूजा शुभ मुहूर्त 2025
हर वर्ष कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार सूर्यदेव 17 सितंबर को कन्या राशि में गोचर करेंगे। कन्या संक्रांति पर पुण्यकाल सुबह 05 बजकर 36 मिनट से लेकर दिन में 11 बजकर 44 मिनट तक है। वहीं महापुण्य काल सुबह 05 बजकर 36 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 39 मिनट तक है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 50 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा जयंती पर फैक्ट्री, कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में काम आने वाली मशीनों और औजारों की पूजा होती है। इसके अलावा इस दिन लोग अपनी कार और मोटर साईकिल की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं साथ ही व्यापार में तरक्की और उन्नति प्राप्त होती है। विश्वकर्मा जयंती के दिन व्यापार और निर्माण आदि जैसे कार्यों में आने वाली मशीनों और औजारों की पूजा करने से इसमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है।
कौन है भगवान विश्वकर्मा
हिंदू धर्म में विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के सबसे बड़े और अद्भुत शिल्पकार और प्रजापति ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र भगवान विश्वकर्माजी का प्राकट्य दिवस हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है। विश्वकर्मा जी को दुनिया का पहले शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर थे। ऐसी मान्यता है कि जब ब्रह्राा जी ने सृष्टि की रचना की तो भवनों और महलों के निर्माण का कार्य इन्हें सौपा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार विश्वकर्माजी ने इंद्रपुरी, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका और हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथपुरी आदि का निर्माण किया था।इसके अलावा श्रीहरि भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र,शिव जी का त्रिशूल,पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज को भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। विश्वकर्मा जयंती पर विशेष तौर पर निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती है।
विश्वकर्मा पूजाविधि
कन्या संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर करके साफ और अच्छे कपड़े धारण करते हुए औजारों, मशीन आदि की सफाई करके विश्वकर्मा जी की प्रतिमा या चित्र लगाकर रोली,अक्षत,फल-फूल आदि से उनकी पूजा करें। सभी औजारों और मशीनों के कलावा बांधें एवं मिठाई से पूजा करते हुए उनकी आरती करें। पूजा के दौरान “ॐ विश्वकर्मणे नमः” मंत्र का उच्चारण करें।