March 6, 2026

धमतरीं जिले के सरकारी भवन में चल रहा है सेहत से खिलवाड़ का खेल…

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  • भटगांव में घटिया गुणवत्ता की बालूशाही-मिक्चर इकाई पर एफडीए की बड़ी कार्रवाई
  • जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा की शिकायत पर हुई सख्त कार्यवाही — मौके पर मिली गंदगी और मानकहीन उत्पादन प्रक्रिया
  • बिना लाइसेंस संचालित हो रही थी खाद्य सामग्री निर्माण इकाई, नमूने भेजे गए रायपुर लैब

धमतरी।धमतरी जिले के ग्राम भटगांव स्थित रीपा सेंटर में संचालित बालूशाही, सेव मिक्चर एवं अन्य खाद्य सामग्री निर्माण इकाई पर 3 नवम्बर को बड़ी कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा की शिकायत पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) धमतरी की टीम द्वारा की गई।

अध्यक्ष अरुण सार्वा एवं सभापति अजय फत्ते लाल ध्रुव ने रीपा सेंटरों की स्थिति का निरीक्षण करते हुए भटगांव पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि खाद्य सामग्री अत्यधिक गंदगी में खुले में तैयार की जा रही थी। जगह-जगह भिनभिनाती मक्खियां, बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करते वर्कर, और मानक से परे रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका ने स्थिति को गंभीर बना दिया।

इस पर तत्काल एफडीए अधिकारी सर्वेश यादव को सूचना दी गई। वे अपनी टीम — फूड सेफ्टी अधिकारी फनेश्वर पिथौड़ा और नमूना सहायक वर्मा के साथ मौके पर पहुंचे। जांच में पाया गया कि संचालक अनिल कुमार कलवानी (निवासी आमापारा, धमतरी) बिना किसी लाइसेंस के खाद्य निर्माण कार्य कर रहा था। टीम ने खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 एवं विनियम 2011 के तहत विधिक नमूना संग्रहन करते हुए “विदाउट लाइसेंस” की धारा में कार्रवाई की।

अरुण सार्वा ने मीडिया से कहा —

 

> “जिस गंदगी और लापरवाही में ये खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे थे, उनका सेवन अधिकतर बच्चे करते हैं। यह उनकी सेहत के लिए खतरा है। लोग व्यापार करें, लेकिन बच्चों की सेहत और जीवन से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।”

 

 

ग्राम पंचायत भटगांव के सरपंच फागूराम साहू एवं सचिव गजेन्द्र नेताम ने बताया कि उक्त संचालक को पांच बार से अधिक चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन सुधार नहीं हुआ। साथ ही उसने कई माह से पंचायत का किराया भी नहीं दिया है। अब पंचायत की बैठक बुलाकर उसे उक्त स्थल से हटाने की प्रक्रिया की जाएगी।

 

एफडीए अधिकारी ने बताया कि, निर्माण में किसी प्रकार का लाइसेंस नहीं होना, एसओपी मानक प्रक्रिया का पालन नहीं पाया गया। बालूशाही और सेव मिक्चर के चार नमूने (प्रत्येक दो किलो) रायपुर लैब भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में जब हमारे संवाददाता ने संचालक अनिल कलवानी से बातचीत कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की बात करने और प्रश्नों का उत्तर देने से साफ इनकार कर दिया।

 

जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर इस तरह की मानकहीन और अस्वच्छ खाद्य सामग्री का निर्माण होना चिंताजनक है। यदि मुख्यालय के इतने समीप यह स्थिति है, तो जिले के आंतरिक ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के अवैध उत्पाद निर्माण से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसलिए आवश्यक है कि जिला प्रशासन इस दिशा में बड़ी और ठोस कार्यवाही कर ऐसे अस्वास्थ्यकर खाद्य निर्माण इकाइयों पर सख्त रोक लगाए।

 

बच्चों की सेहत से जुड़े इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा और सभापति अजय फत्ते लाल ध्रुव की तत्परता और कार्रवाई की आम नागरिकों ने खुलकर सराहना की।