March 6, 2026

गुरु घासीदास जयंती पर लक्ष्मी ध्रुव बोलीं—‘मनखे-मनखे एक समान’ से ही समाज मजबूत…

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नगरी। ग्राम दुधवार में महान संत, समाज सुधारक और सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरु घासीदास बाबा की जयंती श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक चेतना के साथ गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सिहावा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पीसीसी सदस्य प्रभातराव मेघावाले ने की। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, महिलाएं, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि लक्ष्मी ध्रुव ने अपने संबोधन में गुरु घासीदास बाबा के जीवन, तपस्या और विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा ने समाज को सत्य, समानता और मानवता का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि बाबा का संदेश “मनखे-मनखे एक समान” आज भी सामाजिक समरसता, भाईचारे और आपसी सम्मान की सबसे मजबूत नींव है। “सतनाम” का विचार केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन को सही दिशा देने वाला दर्शन है।

लक्ष्मी ध्रुव ने कहा कि गुरु घासीदास बाबा ने उस दौर में समाज सुधार का कार्य किया, जब छुआछूत, भेदभाव और अंधविश्वास जैसी कुरीतियां समाज में गहराई तक फैली थीं। उन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सच्चा परिवर्तन उपदेश से नहीं, बल्कि व्यवहार से आता है। बाबा का जीवन आज की पीढ़ी को सत्य, अहिंसा, परिश्रम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

अपने वक्तव्य में लक्ष्मी ध्रुव ने समाज को कमजोर करने वाली बुराइयों से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच, अच्छी शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली से ही सशक्त समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे गुरु घासीदास बाबा के आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभातराव मेघावाले ने कहा कि गुरु घासीदास बाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के महान स्रोत थे। उन्होंने सरल जीवन, उच्च विचार और सत्य के मार्ग पर चलकर समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वावलंबन, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों को अपनाकर ही गांव और क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गुरु घासीदास बाबा की जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संकल्प का अवसर है। अंत में ग्रामवासियों ने बाबा के आदर्शों पर चलने, समाज में समानता, प्रेम और सौहार्द बनाए रखने तथा विकास के मार्ग पर मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

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