आज नेहरू नगर में कबीर वाटिका में आयोजित रामकथा का द्वितीय दिवस…
आज नेहरू नगर में कबीर वाटिका में आयोजित रामकथा का द्वितीय दिवस पर परमपूज्य दीदी माँ मन्दाकिनी श्रीरामकिंकरजी ने कहा कि-
आपको जब कोई पद प्राप्त हो, तो आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि आपको बहुत बड़ी श्रेष्ठता प्राप्त हो गई। पद प्राप्त होने के बाद पदाधिकारी का दायित्व और भी बढ़ जाता है। क्योंकि पद को हम पैर भी कहते हैं, पैर का स्थान शरीर में सबसे नीचे होता है। पैर का कार्य है शरीर की सेवा करना, उसी प्रकार पद प्राप्त किये हुए व्यक्ति का भी कर्तव्य है कि वह भी अपने आप को जनता का सेवक ही समझे मालिक नहीं।
परमपूज्य माँ ने कथा में कहा कि पद प्राप्त करने के बाद मद होने की पूर्ण सम्भावना रहती है। इसलिए हमें मद रूपी अहंकार से बचना चाहिए। दीदी माँ ने बताया कि जैसे शराब के नशे में चूर व्यक्ति के पाँव डगमगाने लगते हैं उसी प्रकार पद प्राप्त व्यक्ति के पग भी अहंकार के कारण डगमगाने लगते हैं। इसलिए व्यक्ति को पद तो मिले किन्तु पद के साथ मद न हो जाय सावधानी की आवश्यकता है।

