वेनेजुएला का तेल भारत को बेचने के लिए तैयार अमेरिका: व्हाइट हाउस
नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के रिश्तों में ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिका भारत को वेनेजुएला का तेल खरीदने की इजाजत देने के पक्ष में है. हालांकि यह बिक्री एक नए अमेरिकी-नियंत्रित ढांचे के तहत होगी. इस कदम को भारत के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में रूस से तेल खरीद को लेकर उस पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ की चेतावनी का माहौल बना हुआ है.
अमेरिका की नई तेल नीति क्या है
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, वेनेजुएला का तेल अब दोबारा वैश्विक बाजार में उतारा जाएगा, लेकिन इसकी मार्केटिंग और भुगतान व्यवस्था पर वॉशिंगटन का नियंत्रण रहेगा. अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस्टोफर राइट ने साफ किया कि तेल बिक्री से होने वाली रकम अमेरिकी नियंत्रण वाले खातों में जाएगी. बाद में यह पैसा वेनेजुएला के लोगों के हित में खर्च किया जाएगा, न कि भ्रष्टाचार या किसी खास शासन के फायदे के लिए.
सिर्फ भारत नहीं, कई देशों को मिलेगा मौका
ऊर्जा सचिव ने यह भी कहा कि वेनेजुएला का कच्चा तेल केवल कुछ गिने-चुने देशों तक सीमित नहीं रहेगा. यूरोप, एशिया और दुनिया के कई हिस्सों से इसकी मांग है. खास बात यह है कि अमेरिका की कई रिफाइनरियां पहले से ही वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए बनी हैं, जिससे इसकी वैश्विक मांग और मजबूत होती है.
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी राहत
अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले भारत वेनेजुएला का बड़ा खरीदार था. भारत की कई जटिल रिफाइनरियां भारी कच्चे तेल के हिसाब से तैयार की गई हैं, जो वेनेजुएला के क्रूड के लिए उपयुक्त हैं. दोबारा सप्लाई शुरू होने से भारत को सस्ता और अनुकूल तेल मिल सकता है, जिससे रिफाइनिंग लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा.
रूस पर निर्भरता घटाने का विकल्प
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बनाया है. बीते साल अमेरिका ने इसी वजह से भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था. अब वेनेजुएला का विकल्प मिलने से भारत को रूस पर निर्भरता घटाने और बातचीत की स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
ऊर्जा सुरक्षा और बाजार पर असर
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला से सप्लाई खुलने से भारत अपनी ऊर्जा आयात रणनीति में विविधता ला सकेगा. भारत तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग वाला देश है और आयात पर काफी निर्भर है. ऐसे में यह फैसला न सिर्फ कूटनीतिक रूप से अहम है, बल्कि भारतीय बाजार और निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.