March 12, 2026

छग बॉटलिंग एसो के बैनर तले हजारों महिलाओं एवं दिव्यांगों ने कलेक्ट्रेट में किया विरोध प्रदर्शन …

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  • देसी विदेशी मदिरा प्लास्टिक बोतल में नहीं कांच की बोतल में ही हो सप्लाई
  •  हजारों महिलाएं एवं दिव्यांग हो जाएंगे बेरोजगार, सरकार कर पुनः विचार 

दुर्ग : दुर्ग छत्तीसगढ़ बॉटलिंग एसोसिएशन के व्यापारी मनोज मलिक के नेतृत्व में आज हजारों महिलाएं एवं दिव्यांगजन कलेक्ट्रेट दुर्ग में राज्यपाल के नाम कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपने पहुंची थी.छत्तीसगढ़ बॉटलिंग एसोसिएशन ने सात सूत्रीय मांग पत्र राज्य के महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह एवं दुर्ग लोकसभा के सांसद विजय बघेल के अलावा दुर्ग कलेक्टर को देसी विदेशी मदिरा की प्लास्टिक बोतल पर रोक लगाने के लिए ज्ञापन सौंपा. जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के अफसरों ने आश्वस्त किया कि आप की मांगों को शासन के समक्ष रखा जाएगा अंतिम निर्णय राज्य शासन को ही लेना होगा. श्री मलिक ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के आबकारी विभाग द्वारा देसी विदेशी मदिरा के लिए प्लास्टिक बोतल के चलन की मान्यता जो दी जा रही है, वो गलत है एवं पर्यावरण के लिए भी भारी नुकसानदायक है. प्लास्टिक बोतल में अल्कोहल मिलने से कैंसर की बीमारी बहुत तेजी से मदिरा प्रेमियों के बीच फैलेगी. जहां एक ओर अपने देश के वित्तीय बजट में कैंसर की दवाओं को सस्ता करने की बात डबल इंजन की सरकार ने कही है. लेकिन वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार में बैठे हुए जनप्रतिनिधि एवं नौकरशाह किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए मदिरा को प्लास्टिक बोतल में देने के लिए आमादा है. सात सूत्रीय ज्ञापन में प्रमुख मांगे प्लास्टिक बोतल के चलन में आने से लाखों लोगों का रोजगार समाप्त हो जाएगा. प्लास्टिक बोतल के चलन में आने से पर्यावरण को नुकसान होगा. सरकार को जीएसटी में भी काफी नुकसान होगा. राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा प्लास्टिक को बंद करने की पहल हो रही है वहीं दूसरी तरफ शराब प्लास्टिक की बोतल में आने की प्रक्रिया समझ से परे है. प्लास्टिक की बोतल में शराब आने से लोगों के स्वास्थ्य (कैंसर ) बीमारी का खतरा भी पैदा होगा. प्लास्टिक बोतल में शराब भरी होने से सिर्फ डिस्टलरी को फायदा होगा. अन्य लाखों लोग बेरोजगार होंगे. प्लास्टिक बोतल में शराब की भरी होने से छत्तीसगढ़ राज्य में प्रत्येक माह लगभग 10 करोड़ खाली बोतलों का सड़कों पर, खेतों में

एवं अन्य जगहों में कचरे के रूप में प्रदूषण बढ़ेगा. जिसका निष्पादन संभव नहीं हो पाएगा. श्री मलिक ने आगे कहा कि कांच की बोतल धुलाई के कार्य में दिव्यांग जनों सहित हजारों महिलाओं का सीधे तौर पर रोजगार प्रभावित होगा. पिछले 15 से 25 वर्षों से यह सभी महिलाएं एवं दिव्यांगजन दुर्ग जिले में वर्षों से कांच की बोतल धोने का काम कर रही हैं. इन्हें अपना परिवार चलाने में आर्थिक संकटों से जूझना पड़ेगा. सरकार का फैसला गलत है. सरकार इस पर पुनः विचार करें. साथ ही सरकार हमारी इन मांगों पर यदि ध्यान नहीं देगी तो हमें माननीय न्यायालय की शरण में जाकर आईपीएल लगाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. कांच की बोतल धुलाने का कार्य वर्ष 1981 से दादा परदादा के समय से इस व्यवसाय को हम संचालित करते हुए आ रहे हैं, लेकिन आज राज्य सरकार की प्लास्टिक बोतलों में शराब भरे जाने के तुगलकी फरमान से कांच की बोतल धोकर रिबॉटलिंग का कार्य बंद हो जाएगा. सरकार पुनर्विचार करें. प्लास्टिक की बोतलों पर रोक लगाकर पुनः कांच की बोतलों में देसी एवं विदेशी मदिरा को सप्लाई किया जाए. ताकि हजारों महिलाएं बेरोजगारी के दंश से बच सकें.

आज हजारों महिलाओं के साथ व्यापारी सुनील लोहिया, व्यापारी वरुण मलिक के अलावा बड़ी संख्या में व्यापारी कलेक्ट्रेट पहुंचे हुए थे.

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