भारतीय इस्पात प्राधिकरण भारत सरकार की आर्थिक रीढ है राउरकेला स्टील प्लांट को लेकर भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक पांडा के विचार स्वागत योग्य है…
भारतीय इस्पात प्राधिकरण भारत सरकार की आर्थिक रीढ है राउरकेला स्टील प्लांट को लेकर भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक पांडा के विचार स्वागत योग्य है स्वागत शब्द का उपयोग इसलिए किया गया है क्योंकि कारखाने का उत्पादन बढ़ाकर और स्थानीय निवासियों को व्यवस्था देकर यदि कोई राशि संग्रहित की जाती है तो स्वागत योग्य है । वहीं दूसरी और भिलाई इस्पात संयंत्र जिसे देश की आर्थिक रीढ कहा जाता है शनै शनै बर्बाद हो रहा है रखरखाव नहीं होने से और व्यवस्थित बाजार को समाप्त करने के उद्देश्य से लागू की जाने वाली पॉलिसी से एक और जहां लगभग 4000 लघु और मध्यम श्रेणी के व्यापारियों का परिवार जीवन यापन के लिए आर्थिक मानसिक और शारीरिक प्रताडणा से जूझ रहा है कोई दूसरी ओर रिटेंशन, लाइसेंस और हाउस लीज के मकान सब की संख्या मिलकर 20,000 लोग हैं और पारिवारिक संख्या 1 लाख से ऊपर है इसमें से लगभग 15,000 लोगों का परिवार भिलाई इस्पात संयंत्र की सेवा में व बीत चुका है प्रबंधन द्वारा स्वयं तैयार की गई परेशानियां अब यहां के रह वासियों को भारी पड़ने लगी है । 50/ 60 वर्षों से वैधानिक रूप से काबिज लोगों से अवैध पैसा वसूली अभियान भारतीय इस्पात प्राधिकरण को भारी पड़ेगा और भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार यहां समाप्त होते नजर आएगी । समय रहते केंद्र सरकार के मंत्री को और यहां के जन प्रतिनिधियों को भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अध्यक्ष को बैठाकर समझाना होगा । 50- 60 वर्षों से बैठे हुए लोग करोड़ों /अरबो रुपए का भुगतान भिलाई इस्पात केंद्र को कर चुके हैं आपके पास जो खाली भूमि है उसे बाजार मूल्य पर दरो का निर्धारण क्या करना है प्रबंधन तय कर सकता है लेकिन 50-60 वर्षों से रहने वाले लोगों से आज के बाजार मूल्य से पैसा मांगा जाएगा तो किसी भी स्थिति में दिया जाना संभव नहीं है इस बात को समझना होगा और एक अच्छा उद्देश्य लेकर यहां के वातावरण को मजबूत आधार देना होगा अन्यथा आने वाला समय भिलाई के लिए और खतरनाक होगा इस बात का ध्यान रखना होगा ।
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वह अधिकारियों के साथ बैठकर टेबल पर चर्चा करें और जो अधिकारी इस प्रकरण के निराकरण में सहयोग नहीं करना चाहता उनकी शिकायत उच्च अधिकारियों के पास जानी चाहिए पॉलिसी बनाया जाना और उसको अमल में लाना सरकार का उद्देश्य हो सकता है लेकिन पॉलिसी की भी विसंगतियों को दूर करना जनप्रतिनिधियों की अपनी जिम्मेदारी है किसी जनप्रतिनिधी को बलिदान देने की जरूरत नहीं है जरूरत संबंधित लोगों के पांच प्रतिनिधियो को दिल्ली ले जाकर बैठकर चर्चा करने की है शहर की हर समस्या का टेबल चर्चा से हल निकाला जा सकता है *इस्पात मंत्री जी ने स्वयं कहा था जो समस्या वर्तमान में भारतीय इस्पात प्राधिकरण में है यही समस्या यदि हमारे गांव में होती तो हमारे गांव के लोग आग लगा देते हैं । आपका छत्तीसगढ़ बहुत शांत प्रदेश है* मंत्री जी का यह वाक्य हमेशा याद रहेगा और मंत्री जी की भावनाओं के अनुरोध भारतीय इस्पात प्राधिकरण को प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले शहरों के स्थानीय निवासियों को राहत देने की दिशा में काम करना होगा ।
*ज्ञानचंद जैन* *अध्यक्ष*
*भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स भिलाई*