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नगर सैनिकों और बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं मांझी चालकियों के मानदेय में वृद्धि पर रामू नेताम ने जताया मुख्यमंत्री के प्रति आभार…

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  • विष्णुदेव साय सरकार का निर्णय जनसेवा करने वालों और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : रामू नेताम

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ में नगर सैनिकों के मानदेय में प्रस्तावित वृद्धि तथा बस्तर संभाग के पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं मांझी-चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी पर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री एवं मीडिया पैनलिस्ट रामू नेताम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा और संबंधित विभागों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

रामू नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनसेवा करने वाले कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति और पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था के सम्मान के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। नगर सैनिकों के मानदेय में प्रस्तावित वृद्धि और मांझी-चालकी के मानदेय में की गई बढ़ोतरी इसी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 7,900 नगर सैनिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अग्निशमन सेवाओं, आपदा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। विषम परिस्थितियों में उनकी सेवाएं आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में उनके मानदेय को बढ़ाकर 30,870 रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव उनके आर्थिक हितों की दिशा में सकारात्मक पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्ताव पर शासन स्तर से शीघ्र अंतिम निर्णय लेकर इसे लागू किया जाएगा।

रामू नेताम ने बस्तर संभाग के मांझी और चालकी के मानदेय में हुई वृद्धि का स्वागत करते हुए कहा कि मांझी-चालकी जनजातीय समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। सामाजिक समन्वय बनाए रखने, स्थानीय परंपराओं को आगे बढ़ाने और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा जैसे विशिष्ट सांस्कृतिक पर्वों के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

उन्होंने कहा कि मांझी का मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रतिमाह किया जाना पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं के सम्मान की दिशा में सराहनीय निर्णय है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर प्रवास के दौरान इस वृद्धि की घोषणा होना भी जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक संस्थाओं के महत्व को रेखांकित करता है।

रामू नेताम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा, संस्कृति विभाग, गृह विभाग तथा संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के ऐसे निर्णयों से जनसेवा में जुटे लोगों का मनोबल बढ़ेगा और बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार भविष्य में भी जनजातीय समाज के हितों, पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं के सम्मान और जनसेवा में लगे कर्मियों के कल्याण के लिए इसी तरह संवेदनशीलता के साथ कार्य करती रहेगी।