अपने अनुभव के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “जब मैंने भारतीय तिरंगे के साथ दौड़ लगाई, तो वहां मौजूद हजारों दर्शकों ने मुझे जोरदार तरीके से उत्साह बढ़ाते हुए प्रोत्साहित किया। ” इंडिया, इंडिया! ” की गूंज सुनकर मेरी आँखों में गर्व के आँसू आ गए। यह सिर्फ मेरी दौड़ नहीं थी, यह पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करने का एक अनमोल मौका था।”
57 साल की उम्र में यह उनकी साहस, दृढ़ता और भारत के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है। इस मैराथन में उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि उम्र केवल एक संख्या है और जुनून व समर्पण से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
उनकी इस सफलता के बाद, भिलाई में उनके परिवार, दोस्तों और समाज के लोगों ने उनका गर्व से स्वागत किया। उनका यह अनुभव न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि हर भारतीय के लिए यह संदेश है कि अगर आप ठान लें, तो कुछ भी असंभव नहीं।



