सिरप से हुई मौतों पर केंद्र सख्त, राज्यों के साथ स्वास्थ्य सचिव की बैठक; दिए ये अहम निर्देश…
Cough Syrups Death Case: मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक कर दवाओं की गुणवत्ता और सही उपयोग पर चर्चा की। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने दवा निर्माता कंपनियों को नियमों का सख्ती से पालन करने और गैर-कामकाज वाली इकाइयों के लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की –
मध्य प्रदेश-राजस्थान में कफ सिरप के कारण बच्चों की मौत पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से दवा फैक्टरियों की जांच में कोई ढिलाई न बरतने को कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में तय किया गया कि देश के हर जिले में औषधि नियंत्रक अधिकारी दवा निर्माण इकाइयों का निरीक्षण करेंगे। यदि ऐसी फैक्टरियां संशोधित शेड्यूल एम अधिनियम के तहत तय मानकों पर खरी नहीं उतरीं तो उनके लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में रविवार शाम हुई बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 200 से अधिक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। दवा फैक्टरियों की सख्ती से जांच होनी चाहिए। सचिव ने राज्यों से तत्काल संज्ञान लेने और अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेजने को भी कहा है।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों से समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। आईडीएसपी-आईएचआईपी के सामुदायिक रिपोर्टिंग टूल का व्यापक प्रसार हो और अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत बनाया जाए, ताकि किसी भी दवा संबंधी मामले की त्वरित रिपोर्टिंग और संयुक्त कार्रवाई हो सके।
खांसी-जुकाम में घरेलू नुस्खे अपनाने को प्रोत्साहित करें डॉक्टर
बैठक में बच्चों में खांसी की दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल के खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि ज्यादातर मामलों में बच्चों की खांसी और सर्दी-जुकाम अपने आप ठीक हो जाते हैं और इनके लिए दवाओं की जरूरत नहीं होती। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि बच्चों को कॉम्बिनेशन दवाएं और कफ सिरप देने के बजाय अभिभावकों को घरेलू नुस्खे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।
ड्रग कंट्रोलर ने माना-12 बच्चों की मौत कफ सिरप के कारण हुई
देश के ड्रग कंट्रोलर डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बैठक में बताया कि हर बच्चे की मौत के लिए कफ सिरप जिम्मेदार नहीं है। हालांकि राजस्थान में चार में से दो और मध्य प्रदेश में करीब 10 बच्चों की मौत कफ सिरप में मौजूद घातक रसायन की वजह से हुई है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि जांच के दौरान कफ सिरप निर्माता फैक्टरी में कई तरह की खामियां पाई गई। बाजार में भेजने से पहले होने वाली जांच तक नहीं की गई थी। इसके अलावा शेड्यूल एम संबंधी नियमों के अनुपालन में भी कोताही बरती गई।
दूसरी किसी बीमारी का कोई कारण नहीं मिला : आईसीएमआर डीजी
बैठक में पूछे एक सवाल के जवाब में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रभावित जिलों में जब टीम ने दौरा किया तो दवा के अलावा अन्य किसी कारण का पता लगाने पर जोर दिया गया जिसके लिए जल स्रोतों के भी नमूने जांचे गए लेकिन इनमें से किसी भी नमूने में किसी वायरस या खास किस्म बैक्टीरिया की पहचान नहीं हो पाई है जिसके आधार पर किसी संक्रमण की आशंका हो।
बच्चों को कोल्ड्रिफ सिरप लिखने वाला डॉक्टर गिरफ्तार
मध्य प्रदेश पुलिस ने बच्चों को कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर डॉ. सोनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया गया है। जानकारी में सामने आया है कि छिंदवाड़ा में हुई मौत मामले में ज्यादातर बच्चों को डॉक्टर प्रवीण सोनी ने ही ये कफ सिरप लिखी थी। पुलिस डॉ. सोनी से गहन पूछताछ में जुटी है।
फार्मा कंपनी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज
परासिया थाने में डॉ. प्रवीण सोनी के अलावा कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के संचालकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले में ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 27(ए), बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) और 276 (औषधियों में मिलावट) के तहत केस दर्ज किया गया है।
मध्य प्रदेश में मरने वाले बच्चों का आंकड़ा 16 पर पहुंचा
मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप के कारण मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 16 पर पहुंच गई है। छिंदवाड़ा में अब तक 14 बच्चों की मौत हुई है, जिसमें 10 परासिया उपखंड के रहने वाले थे। इसके अलावा, बैतूल जिले में भी दो बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। पिछले दिनों इन बच्चों को इलाज के लिए परासिया लाया गया था। जानकारी के मुताबिक, इन्हें कोल्ड्रिफ कफ सिरप डॉ. सोनी ने ही लिखा था।
कफ सिरप का उत्पादन करने वाली कंपनी पर लटकी तलवार
वहीं दूसरी ओर सरकार कफ सिरप का उत्पादन करने वाली कंपनी पर सख्य कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) तमिलनाडु एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) को ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप निर्माता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराधों के तहत सख्त कार्रवाई करने के लिए कहेगा। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में उन फैक्ट्रियों की जांच शुरू कर दी है जहां से संदिग्ध दवाएं बनी थीं। बता दें कि मामले में सीडीएससीओ ने 19 दवाओं के सैंपल इकट्ठे किए हैं, जिनमें खांसी की सिरप, एंटीबायोटिक और बुखार की दवाएं शामिल हैं।
महाराष्ट्र FDA ने कोल्ड्रिफ सिरप बैच संख्या SR 13 की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। जिन लोगों के पास यह सिरप है, उन्हें इसकी सूचना औषधि नियंत्रण अधिकारियों को देने का निर्देश दिया गया है।
मध्य प्रदेश में नेक्स्ट्रो डीएस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध
मध्य प्रदेश में एक और कंपनी नेक्स्ट्रो डीएस के खांसी की दवा के नमूनों की जांच अभी चल रही है। कुल 19 नमूने लिए गए हैं, जिनमें सिरप, एंटीबायोटिक, बुखार की दवा और ओन्डान्सेट्रॉन शामिल हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो डीएस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है और इसी कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री भी रोक दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस प्रतिबंध की घोषणा की।
सभी राज्यों को केंद्र सरकार का निर्देश
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सलाह दी है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दी जाए। वहीं पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह, सीमित मात्रा और सावधानी के साथ किया जाए। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नुकसानदेह दवाओं पर अब चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
क्या है खतरा?
मामले में तंलगाना सरकार की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कोल्ड्रिफ सिरप के इस बैच में डायएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) नाम का जहरीला रसायन मिला है, जो शरीर के गुर्दों (किडनी) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। इसी कारण तेलंगाना में इस सिरप को लेकर लोगों को उपयोग तुरंत बंद करने की चेतावनी दी गई है।