नकली दवाओं पर शिकंजा: फर्जी दस्तावेज देने पर कंपनियों के लाइसेंस होंगे रद्द, केंद्र सरकार ने औषधि नियम बदले…
नई दिल्ली: केंद्र ने नकली और घटिया दवाओं पर अंकुश के लिए औषधि नियम 1945 में संशोधन किया। अब कोई भी फार्मा कंपनी यदि दवा निर्माण, बिक्री या पंजीकरण में फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देती है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा। दोषी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस और असंतोषजनक जवाब पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। यह कदम दवा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों की हेराफेरी रोकने के लिए है।
भारत में नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ केंद्र सरकार ने अब सीधे कंपनी का लाइसेंस निरस्त करने का फैसला लिया है। सरकार ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत यदि कोई भी फार्मा कंपनी दवा निर्माण, बिक्री या पंजीकरण के लिए फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी का सहारा लेती है, तो उसका लाइसेंस रद्द या निरस्त किया जा सकेगा।
मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि दोषी पाए जाने पर लाइसेंस प्राधिकारी आवेदक को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा, और जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर उसे दवा निर्माण या बिक्री से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जा सकता है। यह प्रतिबंध अवधि प्राधिकारी के विवेक और सिफारिश के अनुसार तय की जाएगी। नई दिल्ली स्थित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने 16 अक्तूबर को संशोधित नियमों का मसौदा जारी कर आम सहमति मांगी थी।
इसके बाद बीते 28 अक्तूबर को अंतिम अधिसूचना प्रकाशित की गई। सीडीएससीओ के अनुसार, यह प्रावधान दवा क्षेत्र में फर्जी सूचनाओं और दस्तावेजों की हेराफेरी पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया है। इसके तहत किसी भी फार्मा कंपनी, वितरक या निर्माता पर कार्रवाई हो सकती है।
इसलिए नियमों में बदलाव जरूरी
सीडीएससीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में पाया गया कि कुछ कंपनियों ने दवा निर्माण या पंजीकरण के लिए गलत जानकारियां और फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। इससे न केवल दवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को भी खतरा हुआ। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के मामले में तमिलनाडु की श्री सन फार्मा कंपनी ने भी भ्रामक दस्तावेजों के ज़रिए राज्य सरकार से लाइसेंस का नवीनीकरण कराया था। ऐसे मामलों को देखते हुए अब नियमों को और कठोर किया गया है।
सुनवाई और अपील का अधिकार रहेगा
दोषी घोषित व्यक्ति या संस्था को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। यदि कोई आवेदन लाइसेंस प्राधिकारी के आदेश से असहमत है तो वह 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। अपील संबंधित सरकार (राज्य या केंद्र) के समक्ष दायर की जाएगी, जो जांच और सुनवाई के बाद अंतिम आदेश पारित करेगी।
फार्मा सेक्टर पर पड़ेगा असर
सरकार का मानना है कि नए नियमों से फार्मा कंपनियों द्वारा गलत सूचना और दस्तावेज देने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। इस बदलाव का असर निर्माण इकाइयों, वितरकों, विक्रेताओं और अनुसंधान संस्थानों पर एक साथ पड़ेगा। अब प्रत्येक लाइसेंस आवेदन के साथ दिए गए दस्तावेजों की सत्यता की जांच अनिवार्य होगी।