March 6, 2026

:19 AM ISRO ने लॉन्च किया देश का सबसे अहम डिफेंस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’…

bogr90vc_isro-pslv_625x300_12_January_26

ISRO Launched PSLV-C62: भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में साल 2026 की शुरुआत एक और बड़ी उपलब्धि के साथ की है. सोमवार, 12 जनवरी की सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपना पहला सैटेलाइट मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया.

भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में साल 2026 की शुरुआत एक और बड़ी उपलब्धि के साथ की है. सोमवार, 12 जनवरी की सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपना पहला सैटेलाइट मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह मिशन भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल PSLV-C62 के जरिए अंजाम दिया गया, जिसके तहत एक साथ कुल 15 उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा गया.

इस लॉन्च का सबसे अहम हिस्सा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 ‘अन्वेषा’ है. इसे धरती से लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा. इस कक्षा में पहुंचने के बाद अन्वेषा दिन-रात पृथ्वी के हर हिस्से पर समान नजर रख सकेगा. इसकी निगरानी क्षमता इतनी उन्नत मानी जा रही है कि इसे भारत का “अंतरिक्षीय सीसीटीवी” तक कहा जा रहा है.

दुश्मन पर पैनी नजर रखने की ताकत

EOS-N1 अन्वेषा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों या भूमिगत बंकरों में छिपी गतिविधियों को भी पकड़ सकता है. आतंकियों की आवाजाही, सीमा पार घुसपैठ, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी जैसी गतिविधियों पर नजर रखने में यह सैटेलाइट सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद कारगर साबित होगा.

हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक से लैस ‘सीक्रेट वेपन’

 

अन्वेषा एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है. यह हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर काम करता है, जो सामान्य कैमरों की तुलना में प्रकाश के कई ज्यादा स्पेक्ट्रम को पहचानने में सक्षम है. इस तकनीक की मदद से धरती पर मौजूद अलग-अलग वस्तुओं और गतिविधियों का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है. यही वजह है कि इसे भारतीय सेनाओं के लिए एक गुप्त हथियार की तरह देखा जा रहा है.

 

सिर्फ भारत ही नहीं, कई देशों के उपग्रह भी शामिल

 

PSLV-C62 मिशन केवल अन्वेषा तक सीमित नहीं रहा. इस प्रक्षेपण में कुल 15 सैटेलाइट भेजे गए, जिनमें एक प्रमुख भारतीय उपग्रह के साथ 14 छोटे उपग्रह भी शामिल हैं. इनमें से 8 सैटेलाइट विदेशी हैं, जो फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन जैसे देशों के हैं. इससे यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दृष्टि से भी अहम बन गया है. कुल मिलाकर, साल 2026 का यह पहला लॉन्च भारत की अंतरिक्ष क्षमता और रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देता है. अन्वेषा के सक्रिय होते ही देश की सीमाओं की निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा सशक्त होने की उम्मीद है.