पांच बार के पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, हजारों लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि…
भिलाई। पांच बार के पार्षद एवं वरिष्ठ समाजसेवी वशिष्ठ नारायण मिश्रा की अंतिम यात्रा में गुरुवार को रामनगर मुक्ति धाम में हजारों की संख्या में नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न समाजों के लोग पहुंचे। नम आंखों से सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन से भिलाई ने एक जनप्रिय, स्पष्टवादी और समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया।
श्रद्धांजलि सभा में सांसद विजय बघेल, डॉ. सलीम राज, प्रभुनाथ मिश्रा, भुपेश बघेल विधायक के.के. झा, मनीष पाण्डेय, देवेन्द्र यादव, विधायक रिंकेश सेन विधायक, सांसद विजय बघेल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने वशिष्ठ नारायण मिश्रा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रभुनाथ मिश्रा ने कहा कि वशिष्ठ नारायण मिश्रा लंबे समय तक अजय पार्षद के रूप में जनता की सेवा करते रहे और उन्होंने अपने कार्यों से अलग पहचान बनाई।
के.के. झा ने कहा कि वशिष्ठ नारायण मिश्रा उनके लिए छोटे भाई के समान थे। वे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में हमेशा आत्मीयता से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि सामान्यतः किसी व्यक्ति की विदाई पर समाज में जय-जयकार होती है, लेकिन आज पूरा मुक्ति धाम नम आंखों से उन्हें नमन कर रहा है। सभी समाजों के लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं, जो उनके व्यापक सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है।
मनीष पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 2000 में नगर निगम बनने के बाद वशिष्ठ नारायण मिश्रा निर्दलीय पार्षद के रूप में अपनी अलग पहचान रखते थे। निगम की बैठकों में वे कई घंटों तक विभिन्न विषयों पर बेबाकी से अपनी बात रखते थे। जब उन्हें अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली, तब वशिष्ठ नारायण मिश्रा से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि उनके जाने के बाद उनके व्यक्तित्व और भिलाई के लिए किए गए कार्यों का महत्व और अधिक महसूस हो रहा है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि वशिष्ठ नारायण मिश्रा बेहद सरल और सजग व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें वरिष्ठ नेताओं का भी स्नेह और सहयोग मिला। वे घंटों बिना रुके अपनी बात रखते थे। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और विचार हमेशा लोगों के मन में जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा कि वशिष्ठ नारायण मिश्रा के विचारों और जीवन संघर्ष को संकलित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद भी वे स्वस्थ होकर लौटते ही आगे की योजनाओं और लेखन को लेकर सक्रिय हो जाते थे। उनके जीवन से सीखने के लिए बहुत कुछ है।
विधायक रिंकेश सेन ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा में यदि किसी बड़े भाई का मार्गदर्शन मिला तो वह वशिष्ठ नारायण मिश्रा जी का था। शुरुआती दौर में दोनों साथ-साथ जाते थे और संघर्ष के दिनों की अनेक यादें उनके साथ जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वैचारिक रूप से वे कांग्रेस के साथ रहे, लेकिन उनका जीवन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि भिलाई की सेवा के लिए समर्पित था। उनकी अंतिम इच्छा थी कि भिलाई में वेंटिलेटर सुविधा से युक्त एंबुलेंस उपलब्ध हो, ताकि किसी मरीज की रास्ते में जान न जाए। विधायक ने कहा कि भिलाई की जनता ने उन्हें दो वेंटिलेटर उपलब्ध कराने का अवसर दिया और वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने इस संबंध में उन्हें लिखकर भी दिया था। उन्होंने कहा, “मैंने अपना बड़ा भाई खो दिया है।”
सांसद विजय बघेल ने कहा कि परमहंस वशिष्ठ नारायण मिश्रा जी का जीवन सादगी, स्पष्टवादिता और संकल्प का उदाहरण था। यदि पुनर्जन्म सत्य है तो ईश्वर उन्हें पुनः इसी परिवार में जन्म दें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से ही उनका वशिष्ठ नारायण मिश्रा से आत्मीय संबंध रहा। निर्दलीय चुनाव के दौर से ही उन्होंने उनके व्यक्तित्व को करीब से देखा। वे अपनी बात बेबाकी से रखते थे और किसी भी जटिल विषय पर गहराई से चर्चा करते थे। उन्हें दिखावे और सस्ती लोकप्रियता से हमेशा दूरी रही। वे मोबाइल तक नहीं रखते थे और अपने विचारों तथा संकल्पों को लेकर सदैव दृढ़ रहते थे।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि आज अंतिम यात्रा में उमड़ा यह विशाल जनसमूह इस बात का प्रमाण है कि वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया था। उन्होंने कहा कि उनके अधूरे कार्यों को पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी है और उनके विचारों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
रामनगर मुक्ति धाम में उपस्थित हजारों लोगों ने नम आंखों से वशिष्ठ नारायण मिश्रा को अंतिम विदाई दी और उनके सामाजिक योगदान एवं जनसेवा को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
नासिर भाई की कलम से



